परेश बरुआ का बेटा रिहा

उल्फ़ा
Image caption बातचीत के मुद्दे पर उल्फ़ा दो धड़े में बँट गया है

असम के अलगाववादी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ़्रंट ऑफ़ असम (उल्फ़ा) ने कहा है कि संगठन के शीर्ष नेता परेश बरुआ के बेटे को रिहा कर दिया गया है.

पिछले दिनों उल्फ़ा की सैन्य इकाई के प्रमुख परेश बरुआ ने आरोप लगाया था कि उनके बेटे अरिंदम बरुआ को बांग्लादेश में अगवा कर लिया गया है.

परेश बरुआ ने ये भी आरोप लगाया था कि अपहरणकर्ताओं भारत सरकार से बातचीत के लिए उन पर दबाव डाल रहे हैं. हालाँकि भारतीय ख़ुफ़िया अधिकारियों ने परेश बरुआ के आरोपों को ख़ारिज कर दिया था.

भारतीय अधिकारियों का दावा है कि भारत सरकार के साथ शांति प्रक्रिया में शामिल होने को लेकर संगठन बँटा हुआ है.

उल्फ़ा की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि परेश बरुआ का बेटा अब रिहा कर दिया गया है.

बयान में कहा गया है- अपहरणकर्ताओं ने उनके बेटे को प्रताड़ित किया और परेश बरुआ का पता-ठिकाना पूछा. उन्होंने उनकी संपत्ति और निवेशों के बारे में भी पूछताछ की. अपहरणकर्ताओं ने अरिंदम से अपने पिता से बात करने को कहा लेकिन वो ऐसा नहीं कर सके क्योंकि उन्हें अपने पिता के बारे में नहीं पता था. अब उन्हें छोड़ दिया गया है लेकिन वे सदमे में हैं.

परेश बरुआ ने पहले ही कह दिया था कि उनके बेटे को अगवा करने की रणनीति काम नहीं करेगी.

उन्होंने कहा था, "असम की आज़ादी के लिए हज़ारों युवकों और महिलाओं ने अपनी जान गँवाई है. मेरा बेटा भी शहीदों की लंबी सूची में शामिल हो सकता है. अगर ऐसा होता है, तो मैं इसके लिए तैयार रहूँगा."

इशारा

हालाँकि परेश बरुआ ने इस बारे में कोई विवरण नहीं दिया था कि उनके बेटे को कब अगवा किया गया था. हालाँकि उन्होंने भारतीय साज़िश की ओर इशारा किया था.

उन्होंने अपने बयान में उन्होंने उल्फ़ा के कुछ वरिष्ठ नेताओं की भी आलोचना की थी. उन्होंने आरोप लगाया थी कि ये नेता कई तरह की बातें फैला रहे हैं और भारत के साथ बातचीत शुरू करने की कोशिश कर रहे हैं.

परेश बरुआ भारत के साथ बातचीत का विरोध करते रहे हैं. उनका कहना है कि जब तक एजेंडे में असम की संप्रभुता का मुद्दा नहीं होता, भारत के साथ बातचीत नहीं हो सकती.

भारत सरकार के साथ बातचीत का समर्थन करने वाले उल्फ़ा के धड़े के प्रवक्ता मिथिंगा दैमेरी ने अपहरण की ख़बर को काल्पनिक बताया था.

भारत के साथ बातचीत करने के वादे के बाद उल्फ़ा के कई नेताओं को रिहा किया गया है. उल्फ़ा के चेयरमैन अरबिंद राजखोवा इस समय जेल में हैं.

उन्हें पिछले साल बांग्लादेश में पकड़ा गया था और फिर भारत के हवाले कर दिया गया था. लेकिन माना जा रहा है कि अरबिंद राजखोवा भी जल्द ही रिहा हो सकते हैं क्योंकि असम सरकार ने उनकी ज़मानत याचिका का विरोध नहीं किया है.

वर्ष 1979 से उल्फ़ा अलग असम राज्य की मांग को लेकर संघर्ष कर रहा है.

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