'तेलंगाना की रिपोर्ट निष्पक्ष होगी'

तेलंगानाः विरोध प्रदर्शन (फ़ाइल फ़ोटो)

पृथक तेलंगाना राज्य के गठन की संभावना तलाश करने के लिए गठित समिति के प्रमुख जस्टिस बीएन श्रीकृष्णा ने कहा है कि समिति तेलंगाना पर 'निष्पक्ष और पेशेवराना' रिपोर्ट देगी.

तेलंगाना राज्य के मसले पर इस समिति ने पिछले 11 महीनों में बड़ी संख्या में लोगों की राय जानी है और जैसा कि जस्टिस कृष्णा का कहना है उनकी रिपोर्ट अधिकतम लोगों को संतुष्ट करने वाली होगी.

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बीएन कृष्णा की अध्यक्षता में पाँच सदस्यीय समिति का गठन इसी साल तीन फ़रवरी को किया गया था.

इस समिति को 31 दिसंबर से पहले गृहमंत्री पी चिदंबरम को अपनी रिपोर्ट सौंपनी है.

उल्लेखनीय है कि गत वर्ष नवंबर में चिदंबरम ने यह घोषणा कर दी थी कि केंद्र सरकार तेलंगाना राज्य के गठन की प्रक्रिया शुरु कर रही है. इसके बाद आंध्र प्रदेश में राजनीतिक भूचाल आ गया था.

इसके बाद केंद्र सरकार को तेलंगाना राज्य के गठन के मसले पर सभी वर्गों के लोगों से बात करने के लिए एक समिति का गठन करना पड़ा था.

उम्मीद

दिल्ली में एक प्रेसकॉन्फ़्रेंस में जस्टिस श्रीकृष्णा ने उम्मीद जताई कि समिति की रिपोर्ट पृथक तेलंगाना राज्य की मांग और आंध्र प्रदेश को अविभाज्य रखने दोनों मांगों के संदर्भ में एक स्थाई समाधान सुझाएगी.

इस रिपोर्ट के विवरण देने से इनकार करते हुए उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक दलों ने यह आश्वासन दिया है कि समिति की रिपोर्ट आने के बाद वे शांति और सौहार्द्र बनाए रखेंगे.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार उन्होंने कहा, "मैं उम्मीद करता हूँ कि रिपोर्ट आने के बाद प्रदेश में शांति बनी रहेगी. यह राजनीतिक दलों और मीडिया की ज़िम्मेदारी है."

हालांकि समिति के सदस्य सचिव विनोद के दुग्गल ने संकेत दिए कि रिपोर्ट दो खंडों में होगी जो राज्य के गठन को लेकर कई विकल्प सुझाएगी और हर सुझाव के साथ नफ़े-नुक़सान का ज़िक्र होगा.

पूर्व गृहसचिव दुग्गल ने कहा, "इस रिपोर्ट के बाद हर राजनीतिज्ञ यह कहेगा कि यह अच्छे शोध के बाद तैयार की गई रिपोर्ट है जो पूरी तरह से निष्पक्ष है और पेशेवराना ढंग से तैयार की गई है. मैं उम्मीद करता हूं कि इससे सभी संतुष्ट होंगे और यह सकारात्मक होगी."

जस्टिस श्रीकृष्णा ने कहा है कि वे तय तिथि 31 दिसंबर से पहले अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप देंगे.

इस समिति ने फ़रवरी में गठन के बाद 30 बैठकें कीं, आंध्र प्रदेश के 23 ज़िलों और 35 गाँवों का दौरा किया और सौ से अधिक संगठनों से चर्चा की.

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