माओवादियों का विरोध सप्ताह का ऐलान

बिनायक सेन

नक्सलियों या माओवादियों ने बिनायक सेन, नारायण सान्याल और पीयूष गुहा सहित कई अन्य लोगों को विभिन्न अदालतों में सुनाई गई सज़ा के ख़िलाफ़ दो से आठ जनवरी तक देशव्यापी विरोध सप्ताह मनाने का आह्वान किया है.

माओवादियों ने एक बयान जारी करके कहा गया है कि इस विरोध सप्ताह के दौरान पत्रकार-वार्ता, बयानों, विरोध प्रदर्शनों, धरना, रास्ता रोको, सभा-सम्मेलनों, हस्ताक्षर अभियान और पुतला दहन जैसे कार्यक्रम आयोजित करने की अपील की गई है.

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के प्रवक्ता अभय की ओर से जारी बयान में कहा है, "बिनायक सेन, हमारी पार्टी के पोलित ब्यूरो के सदस्य कॉमरेड नारायण सान्याल और व्यापारी पीयूष गुहा को फ़र्ज़ी मामलों में फंसाकर आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई है."

इस बीच नारायण सान्याल के वकील हाशिम ख़ान ने कहा है कि बिनायक सेन और नारायण सान्याल के ख़िलाफ़ अदालत में पेश किए गए सबूत और गवाह कमज़ोर हैं.

दूसरी ओर वरिष्ठ वकील और भाजपा के सांसद रामजेठमलानी ने कहा है कि वे मानते हैं कि बिनायक सेन देशद्रोही नहीं हैं और अगर उनसे संपर्क किया गया तो वे बिनायक सेन का मुक़दमा लड़ना चाहेंगे.

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ की एक अदालत ने बिनायक सेन, नारायण सान्याल और पीयूष गुहा को देशद्रोह का दोषी ठहराते हुए उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई है.

विरोध सप्ताह

माओवादियों ने अपने बयान में बिनायक सेन, नारायण सान्याल और पीयूष गुहा को सुनाई गई सज़ा के अलावा क्रांतिकारी पत्रिका 'ए वर्ल्ड टू विन' का हिंदी संस्करण संभालने वाले असित सेनगुप्ता को आठ साल की सज़ा सुनाए जाने का विरोध किया है.

इस बयान में पार्टी के कुछ और कार्यकर्ताओं को 'झूठी गवाहियों के आधार पर सज़ा दिलवाए जाने का विरोध' किया गया है.

इस बयान में कहा गया है, "डॉ. बिनायक सेन को यह सज़ा सिर्फ़ इसलिए दी गई है क्योंकि वो सरकार की दमनकारी नीतियों और फासीवादी सलवा जुड़ुम का शुरु से विरोध करते रहे, काला क़ानून छत्तीसगढ़ जनसुरक्षा क़ानून के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाते रहे और जायज़ जनांदोलन के समर्थन में खड़े रहे."

पार्टी प्रवक्ता अभय ने कहा है, "पार्टी के वरिष्ठ नेता और 73 साल के उम्रदराज़ नारायण सान्याल को छत्तीसगढ़ की दमनकारी रमन सरकार ने पिछले पाँच सालों से जेल की कालकोठरी में बंद कर कई झूठे मुक़दमों में फँसा रखा है."

माओवादियों ने कई कंपनियों का नाम लेकर कहा है कि इनकी मनमानी लूट में माओवादियों को बाधा के रूप में देखते हुए ही यूपीए सरकार ने माओवादी आंदोलन को देश की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा ख़तरा घोषित किया है.

बयान में पार्टी ने भारतीय दंड विधान (आईपीसी), छत्तीसगढ़ विशेष जनसुरक्षा क़ानून (सीएसपीएसए) और ग़ैरक़ानूनी गतिविधि निरोधक क़ानून (यूएपीए) और मकोका को ख़त्म करने की मांग की गई है.

माओवादियों ने देश के बुद्धिजीवियों से विभिन्न आंदोलनों के ज़रिए 'षडयंत्रकारी तरीक़े से सुनाई गई सज़ाओँ का विरोध करने की अपील' की है.

माओवादी हिंसा

बीबीसी के छत्तीसगढ़ संवाददाता सलमान रावी के अनुसार माओवादियों ने विरोध सप्ताह मनाने का ऐलान ऐसे समय में किया है जबकि क़ानूनी और सामाजिक गलियारों में बिनायक सेन को सुनाई गई सज़ा पर बहस छिड़ी हुई है.

लेकिन छत्तीसगढ़ की पुलिस का कहना है कि विरोध सप्ताह की घोषणा भले ही अभी हुई हो लेकिन माओवादियों ने इसके विरोध स्वरुप फ़ैसला सुनाए जाने के बाद से ही बस्तर में हिंसा शुरु कर दी है.

पुलिस का कहना है कि 24 दिसंबर के बाद से ही माओवादियों नें छत्तीसगढ़ में हिंसक वारदातों को अंजाम देना शुरू कर दिया है. दंतेवाड़ा में माओवादियों ने दो बार रेल की पटरियों को निशाना बनाया है जिसकी वजह से एक बार एक मालगाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गई तो दूसरी बार एक राहत ट्रेन.

इसके अलावा बस्तर संभाग के नारायणपुर जिले में तीन थानों पर माओवादियों ने हमला भी किया. वहीं बीजापुर में लौह अयस्क से लदे एक ट्रक को आग के हवाले कर दिया गया.

बीजापुर में पुलिस का कहना है कि माओवादियों ने कई यात्री वाहनों को रोक कर तलाशी ली है.

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