आरुषि के माँ-बाप की भूमिका पर 'संदेह'

राजेश तलवार
Image caption राजेश तलवार पुलिस हिरासत में भी रहे हैं

बहुचर्चित आरुषि हत्याकांड में एक और मोड़ आ गया है.

वैसे तो पहले भी उत्तर प्रदेश पुलिस ने आरुषि हत्याकांड में उनके पिता राजेश तलवार पर संदेह व्यक्त किया था और उन्हें हिरासत में भी रखा गया था.

लेकिन समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने केस को बंद करते हुए जो रिपोर्ट अदालत को सौंपी है, उसमें एक बार फिर राजेश तलवार और नुपुर तलवार की भूमिका पर संदेह व्यक्त किया गया है.

हालाँकि सीबीआई ने ये भी कहा है कि सबूतों के अभाव में इनलोगों के ख़िलाफ़ आरोपपत्र दाख़िल नहीं किया गया.

अपनी रिपोर्ट में सीबीआई ने आरोप लगाया है कि राजेश और नुपुर तलवार ने आरुषि का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर पर दबाव डालने की कोशिश की थी.

इनकार

हालाँकि तलवार दंपत्ति ने इन आरोपों को सिरे से नकार दिया है. उन्होंने सीबीआई की इस रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि ये बेबुनियाद आरोप है.

पत्रकारों से बातचीत में नुपुर तलवार ने कहा, "ये बेहद बेतुका और विचित्र आरोप है. हम तो ख़ुद जाँच के लिए मांग करते रहे हैं."

उन्होंने आरोप लगाया कि सीबीआई उत्तर प्रदेश पुलिस की नाकामी को ढँकने की कोशिश कर रही है. उन्होंने कहा कि घटना की सूचना मिलने के साथ ही पुलिस ने घटनास्थल को अपनी निगरानी में ले लिया था.

सीबीआई ने केस बंद करते हुए 30 पन्ने की अपनी रिपोर्ट ग़ाज़ियाबाद की एक अदालत में पेश की है.

इस रिपोर्ट में सीबीआई ने आरोप लगाया है कि राजेश और नुपुर तलवार ने 16 मई 2008 की सुबह उत्तर प्रदेश की पुलिस से रेलवे स्टेशन जाकर अपने नौकर हेमराज को पकड़ने को कहा और इस बीच आरुषि का कमरा धो दिया.

15 मई की रात आरुषि की हत्या उनके नोएडा स्थित घर पर कर दी गई थी. अगले दिन हेमराज का शव घर की छत से मिला था.

सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में ये भी कहा है कि आरुषि के सिर पर जो चोट के घाव थे, उसका आकार राजेश तलवार के गोल्फ स्टिक से मिलता-जुलता था.

दावा

सीबीआई का कहना है कि ये गोल्फ़ स्टिक तलवार दंपत्ति ने गहन पूछताछ के बाद एक साल बाद सौंपी थी.

Image caption वर्ष 2008 मई में आरुषि की हत्या हुई थी

हालाँकि नुपुर तलवार का दावा है कि उन्होंने ख़ुद से ही वो गोल्फ स्टिक सौंपी थी, सीबीआई ने उनसे इसके लिए कुछ नहीं कहा था.

केस बंद करने की अपनी रिपोर्ट के कारण आलोचनाओं के घेरे में आई सीबीआई ने कहा है कि आरुषि के माता-पिता का व्यवहार संदेहास्पद रहा है.

सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में तलवार परिवार के तीनों नौकरों कृष्णा, राजकुमार और विजय मंडल के बारे में कहा है कि तीनों बेकसूर पाए गए.

सीबीआई ने आरुषि हत्याकांड की जाँच जून 2008 में शुरू की थी.

अपनी रिपोर्ट में सीबीआई ने यह भी कहा है कि हत्या के दिन रात साढ़े 10 बजे तक सब कुछ सामान्य था, जो वीडियो कैमरा से ली गई कुछ तस्वीरों से पता चलता है. सीबीआई का कहना है कि आरुषि के पिता मध्यरात्रि तक इंटरनेट से उलझे थे.

सीबीआई ने इस तथ्य को भी रेखांकित किया है कि ये असंभव लगता है कि हत्यारे ने हत्या के बाद शव को चादर में लपेटा हो.

रिपोर्ट में इसका भी ज़िक्र है कि घर में किसी ने जबरन प्रवेश नहीं किया था. और तो और आरुषि का कमरा किसी होटल के कमरे की तरह था, जिसे अंदर से या बाहर किसी चाबी से खोला जा सकता है.

भरोसा

सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि आरुषि के कमरे की चाबी उनकी माँ के पास थी.

सीबीआई ने यह भी दावा किया है कि तलवार दंपत्ति पर हुए नार्को एनालिसिस और पॉलीग्राफ़ी टेस्ट 'अधूरे' थे.

इस बीच सीबीआई की आलोचनाओं के बीच क़ानून मंत्री वीरप्पा मोइली ने शुक्रवार को सीबीआई के निदेशक एपी सिंह से मुलाक़ात की. क़ानूनी मंत्री ने सीबीआई से इस मामले को गंभीरता से लेने को कहा है.

लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने भी आरुषि मामले की जाँच से जुड़े घटनाक्रमों पर निराशा जताई है. उन्होंने कहा, "ये काफ़ी अहम मामला है. हम इसे लेकर चिंतित हैं. एक बच्ची की हत्या हुई है और उसे न्याय क्यों नहीं मिल रहा. हमें इस पर गंभीरता से सोचना चाहिए."

राष्ट्रीय महिला आयोग ने गृह मंत्री और क़ानून मंत्री को पत्र लिखकर इस मामले की दोबारा जाँच की मांग की है.

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