गूजर तीसरे दौर की बातचीत के लिए तैयार

Image caption गूजर पिछले 12 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं

राजस्थान में आंदोलनकारी गूजर नेताओं और सरकार के बीच तीसरे दौर की बातचीत के लिए राह आसान हो गई है.गूजर समुदाय अपने 21 सदस्यों का एक दल सरकार से बातचीत के लिए जयपुर भेजने पर रज़ामंद हो गया है.

नेताओं के मुताबिक अगर सब कुछ ठीक ठाक रहा तो शुक्रवार को ही चौथे दौर की निर्णायक बातचीत हो सकती है जिसमें किरोड़ी सिंह बैंसला खुद भाग लेने जयपुर आएँगे.

आंदोलन के प्रवक्ता डॉक्टर रूप सिंह ने बीबीसी को बताया कि ये गुरुवार देर रात तय हुआ कि सरकार और गूजर नेता बातचीत की टेबल पर आएँ.

गूजर अब भी दिल्ली- मुंबई रेल मार्ग को रोके बैठे हैं और भरतपुर ज़िले में बयाना के निकट इस रेल लाइन पर कब्ज़ा किए हुए हैं.

मगर सरकार से बातचीत के बाद दौसा ज़िले से होकर गुज़र रहे जयपुर -दिल्ली और जयपुर-आगरा मार्ग से धरना हटा लिया गया है. इससे रेलगाड़ियों का आवागमन शुरू हो गया है.

पिछले दो दिन में वातावरण में तनाव का तत्त्व कम हुआ है और दोनों पक्ष मसला बातचीत से सुलझाने पर सहमत हुए हैं.

इससे पहले गुरुवार को गूजर नेताओं ने अपना एक दल राज्य के वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों से बातचीत के लिए भेजा था.ये बातचीत रेल पटरियों के निकट एक गाँव में हुई थी जिसे दोनों पक्षों ने सकारात्मक बताया था. इससे ही आगे संवाद के लिए माहौल बना.

सरकारी पक्ष का नेतृत्व कर रहे जीएस संधू ने गुरुवार को हुई बातचीत को संतोषप्रद बताया.

नहीं हुई हिंसा

गूजर अपनी बिरादरी के लिए सरकारी नौकरियों में पाँच फ़ीसद आरक्षण मांग रहे हैं.सरकार ने इसके लिए प्रावधान किया भी लेकिन हाई कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी.

इससे सरकार और गूजर नेताओं के बीच विवाद गहरा हो गया.हाई कोर्ट ने आरक्षण की मांग कर रही इन जातियों के पिछड़ेपंन का सर्वे करने को कहा है और इसके लिए सरकार को एक साल का समय दिया है.

कोर्ट के फ़ैसले के बाद गूजर सड़कों पर उतर आए और जगह जगह रास्ते रोक दिए.ये आंदोलन पिछले 12 दिन से जारी है. इस कारण उद्योग जगत और व्यापार को भारी नुकसान हुआ है.

इसकी प्रतिक्रिया में अनेक ट्रेड और इंडस्ट्री के संगठनों ने भी गूजर नेताओं से गतिरोध तोड़ने की अपील की है.

ये पहला मौका है जब गूजर आंदोलन के दौरान में कोई हिंसा नहीं हुई है.इससे पहले के दो आंदोलनों ने कोई सत्तर लोगों की जान ले ली थी.

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