गूजर आंदोलन में गतिरोध क़ायम

आंदोलनकारी

आरक्षण के लिए गूजरों का आंदोलन लगातार तेरहवें दिन जारी है.

गूजर नेता अब सरकार की ओर से आश्वासन का इंतज़ार कर रहे हैं जिससे कि वे अपने प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए जयपुर भेज सकें.

ये बातचीत शुक्रवार को होनी थी लेकिन ऐन वक़्त पर गूजर नेता यह कहकर तीसरे दौर की बातचीत से पीछे हट गए थे कि पहले सरकार आरक्षण का आश्वासन दें तभी आगे बातचीत हो पाएगी.

इसके बाद बातचीत खटाई में पड़ गई थी.

गूजर अपनी बिरादरी के लिए सरकारी नौकरियों में पाँच प्रतिशत आरक्षण की माँग कर रहे हैं.

उन्होंने 13 दिनों से दिल्ली-मुंबई रेलमार्ग को जाम कर रखा है.

दो दौर बेनतीजा

इससे पहले गूजरों और सरकार के बीच दो दौर की बातचीत हो चुकी है लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकल सका है.

तीसरे दौर की बातचीत के लिए गूजर नेताओं ने पहले सरकार से बातचीत के लिए अपना 21 सदस्यों का दल जयपुर भेजने का ऐलान किया मगर शाम ढलते-ढलते वे पीछे हट गए.

उनका कहना है कि पहले सतारूढ़ कांग्रेस के गूजर नेता सरकार से बात करें और आरक्षण को लेकर सरकार से सकारात्मक आश्वासन लें इसके बाद ही आंदोलनकारी सरकार से बात करेंगे.

केंद्रीय राज्यमंत्री सचिन पायलट और राजस्थान के ऊर्जा मंत्री जितेंद्र सिंह दोनों ही गूजर समुदाय से हैं और वे सरकार और गूजर नेताओं के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं.

इससे पूर्व गुरुवार को गूजर नेता बातचीत के लिए टेबल पर आए थे और भरतपुर के एक गाँव में सरकार के प्रतिनिधियों से दो घंटे तक बातचीत की थी जहाँ शुक्रवार को तीसरे दौर की बातचीत की सहमति बनी थी.

लेकिन वे पीछे हट गए.

अब गूजरों के नेता किरोड़ी मल बैंसला ने समाचार एजेंसी पीटीआई से हुई बातचीत में कहा है, "अब तक कुछ नहीं हुआ है. हम अपने समुदाय के कांग्रेस नेताओं के जवाब का इंतज़ार कर रहे हैं उसके बाद हम अपना प्रतिनिधि मंडल जयपुर भेजेंगे."

उनका कहना है कि वे पहले ही कह चुके हैं कि वे बातचीत के लिए तैयार हैं लेकिन इससे पहले सरकार की ओर से आश्वासन चाहते हैं.

सरकार का पक्ष

दूसरी ओर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि सरकार गूजर नेताओं से बात कर रही है और उन्हें उम्मीद है कि जल्दी ही इसका हल निकल आएगा.

उन्होंने कहा, "हमें दुख हैं कि नए साल में भी गूजर पटरियों पर बैठे हुए हैं."

मुख्यमंत्री का कहना है कि हाईकोर्ट के फ़ैसले की रोशनी में सरकार को फ़ैसला करना है. उनका कहना है कि सरकार ने गूजरों की कई शर्तें मान ली हैं और शेष के लिए वे सभी दलों के गूजर नेताओं से चर्चा कर रहे हैं.

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