अजमेर दरगाह के नाम पर धांधली

अजमेर
Image caption दुनिया के हर हिस्से से लोग यहां दुआ करने आते है.

भारत में सदियों से अमन और भाईचारे का पैगाम रही अजमेर स्थित ख़्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के नाम पर पाकिस्तान में एक ट्रस्ट बनाने और चंदा बटोरने का मामला सामने आया है.

अजमेर दरगाह के प्रबंधन ने पाकिस्तान में ग़रीब नवाज़ के नाम से ट्रस्ट बनाने और पैसे लेने पर सख्त आपत्ति जताई है और इस बाबत ट्रस्ट को नोटिस भेजने का फ़ैसला किया है.

दरगाह के नाज़िम अहमद राज़ा ने बीबीसी को बताया कि उन्हें ये जानकारी मिली है कि पाकिस्तान के कराची में ‘ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ वैलफेयर ट्रस्ट’ का गठन किया गया है. यह ट्रस्ट डोनेशन केलिए कराची में बैंक खाते के नंबर दे रहा है.

उन्होंने कहा, ''उन्हें इस तरह पैसे लेने का कोई हक़ नहीं है. हम पाकिस्तानी दूतावास को पत्र भेज कर इस ट्रस्ट के नाम पते मांग रहे हैं कानूनी कार्रवाई करेंगे.''

लंगर के नाम पर पैसा

दरगाह में ख़ादिमों की संस्था के एक सदस्य सरवर चिश्ती के मुताबिक, ''एतराज़ इस बात को लेकर है कि उस ट्रस्ट ने लंगर के नाम पर भी चंदा माँगा. ट्रस्ट को लंगर के नाम पर पैसे लेने का अधिकार नहीं है.''

चिश्ती का कहना है कि ‘गरीब नवाज़’ के नाम पर बहुत से ट्रस्ट बने हैं, जो भारत और भारत के बाहर भी काम कर रहे हैं.

हालांकि अजमेर दरगाह को भारतीय उपमहाद्वीप में सबसे अधिक श्रद्घा प्राप्त है. इस दरगाह में अक़ीदत के फूल चढ़ाने आने वालों में हर जाति और धर्म के लोग शामिल हैं. दुनिया के हर हिस्से से लोग यहां दुआ करने आते है.

पाकिस्तान में भी इस दरगाह की प्रति वैसी ही आस्था है जैसी भारत में. यही वजह है कि ख़्वाजा के सालाना उर्स में हर साल पाकिस्तान से अकीदतमंदों का एक दल आता है और ग़रीब नवाज़ के मज़ार पर चादर चढ़ाता है.

पाकिस्तान के राजनेता और फौजी भी इस दरगाह में हाज़री लगाना नहीं भूलते. मरहूम बेनज़ीर भुट्टो ने कई बार अजमेर आकर ख़्वाजा के सामने दुआ की तो उनके विरोधी रहे पूर्व फौजी हुक्मरान परवेज़ मुशरर्फ ने भी यहाँ माथा टेका है.

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