बोफ़ोर्स सौदे में दलाली हुई: आयकर अदालत

क्वात्रोकी

आदेश में विन चड्डा और क्वात्रोकी को दलाली का पैसा दिए जाने का ज़िक्र है

भारत की एक आयकर अदालत ने कहा है कि बोफ़ोर्स तोपों के सौदे में भारतीय व्यापारी विन चड्डा और इतालवी व्यवसायी ओत्तावियो क्वात्रोकी को 41 करोड़ रुपए दिए गए थे और इन आमदनी पर उन्हें इस पर कर देना चाहिए.

अपने 98 पन्ने के आदेश में अदालत ने कहा है, "इस बारे में कार्रवाई न करने से एक अनचाही और हानिकारक धारणा बन सकती है कि भारत एक सॉफ़्ट स्टेट (यानी कार्रवाई करने में ढील बरतने वाला) देश है और उसके कर संबंधित क़ानूनों के साथ खिलवाड़ किया जा सकता है."

इस आदेश के आते ही भारत की राजनीतिक गरमाई है और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी ने सत्ताधारी गठबंधन का नेतृत्व कर रही कांग्रेस पर तीखे प्रहार किए हैं.

उधर कांग्रेस के प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी का कहना था कि कांग्रेस को 'पहले इस आदेश की प्रति देखनी पड़ेगी और ये किस संदर्भ में दिया गया है, ये भी देखना होगा.'

ये एक न्यायिक फ़ैसला है. अब सीबीआई अपना मुँह भी छिपा नहीं सकती. पहले एफ़आईआर दर्ज नहीं किया, फिर चार्जशीट फ़ाइल नहीं की...ये केवल रिश्वत देने का मुद्दा नहीं है बल्कि उसे छिपाने का काम है जो 25 साल चला है...हम सोनिया गांधी को याद दिलाना चाहते हैं कि भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ किसी पाँच सूत्री कार्यक्रम की ज़रूरत नहीं है. एक सूत्री कार्यक्रम ही काफ़ी है - दोषियों को जेल भेजें और सच छिपाने की कोशिश न करें - यही काफ़ी है

भाजपा नेता अरुण जेटली

ग़ौरतलब है कि केंद्रीय जाँच ब्यूरो ओत्तावियो क्वात्रोकी के ख़िलाफ़ आपराधिक मामला बंद कर चुका है.

'बैंक खाते खोले गए, सुराग मिटाए'

समाचार एजेंसियों के अनुसार, ये आदेश विन चड्डा के पुत्र की आयकर विभाग के दावे के बारे में दायर एक अपील पर आया है. विन चड्डा की मृत्यु हो चुकी है.

इस आदेश में ये इस बात का विस्तृत वर्णन है कि बोफ़ोर्स ने 1986 के इस 1437 करोड़ रुपए के सौदे में किसी तरह के दलाल के होने का इनकार किया था.

इस आदेश में ये ज़िक्र भी है कि क्वात्रोकी ने किस तरह सिलसिलेवार तरीके से कई बैंक खाते खोले और इसके सुराग मिटाने प्रयास किए.

अदालत के अनुसार 'बोफ़ोर्स को तोपों की कीमत में से दलाली के 41 करोड़ रुपए को घटा देना चाहिए था क्योंकि सरकार को अधिक पैसे देने पड़े जो इस समझौते के नियमों का उल्लंघन करते हुए चड्डा और क्वात्रोकी को दिए गए.'

'दोषियों को जेल भेजें, सच न छिपाएँ'

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली ने कहा, "ये अजीब स्थिति है. सरकार की आपराधिक जाँच की शाखा - सीबीआई विस्तृत जाँच के बाद कहती है कि कोई दलाली नहीं हुई है. दूसरी ओर रजस्व विभाग कहता है कि दलाली का पैसा दिया गया है और इस पर आयकर दिया जाना चाहिए था."

इस 98 पन्ने के अदालती आदेश में संयुक्त संसदीय समिति और सीबीआई की चार्जशीट से अंश लिए गए हैं. ये विन चड्डा का आयकर विभाग के साथ मामला है, हमारा इससे क्या लेना-देना है...राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार ने अपने छह साल के कार्यकाल में क्या किया..

कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी

उनका कहना था, "ये एक न्यायिक फ़ैसला है. अब सीबीआई अपना मुँह भी छिपा नहीं सकती. पहले एफ़आईआर दर्ज नहीं किया, फिर चार्जशीट फ़ाइल नहीं की...ये केवल रिश्वत देने का मुद्दा नहीं है बल्कि उसे छिपाने का काम है जो 25 साल चला है."

उन्होंने सोनिया गांधी पर निशाना साधते हुए कहा,"हम सोनिया गांधी को याद दिलाना चाहते हैं कि भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ किसी पाँच सूत्री कार्यक्रम की ज़रूरत नहीं है. एक सूत्री कार्यक्रम ही काफ़ी है - दोषियों को जेल भेजें और सच छिपाने की कोशिश न करें - यही काफ़ी है."

अभिषेक सिंघवी ने एक भारतीय टीवी चैनल से कहा, "आप 1987 से बाद से क्या कर रहे थे....हमारी सरकारों ने कभी भी क्वात्रोकी का बचाव करने की कोशिश नहीं की थी. जब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार केंद्र में थी तब कार्रवाई क्यों नहीं की गई."

उन्होंने आगे कहा, "इस 98 पन्ने के अदालती आदेश में संयुक्त संसदीय समिति और सीबीआई की चार्जशीट से अंश लिए गए हैं. ये विन चड्डा का आयकर विभाग के साथ मामला है, हमारा इससे क्या लेना-देना है."

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