बुधवार को गूजरों से अहम बातचीत

राजस्थान में आंदोलनकारी गूजर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला ने अपनी बिरादरी के एक समूह के साथ जयपुर में उर्जा मंत्री जितेन्द्र सिंह से लंबी बात की है.

इस बातचीत को दोनों पक्षों ने सकारात्मक बताया है और कहा है कि बुधवार को अगले दौर की वार्ता होगी जो काफ़ी निर्णायक होगी.

गूजर अपने समुदाय के लिए सरकारी नौकरियो में पाँच फ़ीसद आरक्षण की मांग कर रहे हैं और एक पखवाड़े से जगह-जगह रास्ता रोके बैठे हैं.

गूजर समुदाय के इस आंदोलन के कारण पिछले पन्द्रह दिनों से मुंबई-दिल्ली रेल मार्ग अवरुद्ध है.क्योंकि गूजर भरतपुर ज़िले में इस रेल लाइन पर कब्ज़ा किए बैठे हैं.इसी बीच दोनों पक्षों में गतिरोध टूटा है और गूजर नेता बैंसला ने मंगलवार को आंदोलन स्थल से जयपुर का रुख़ किया और उर्जा मंत्री सिंह के घर पहुंचे.

वहाँ दोनों पक्षों में गूजरों की मांगो को लेकर बैठक हुई. उर्जा मंत्री खुद गूजर समुदाय से हैं और तीन मंत्रियो की उस समिति के सदस्य हैं जिसे समुदाय की मांगों का समाधान निकालने का काम सौंपा गया है.

इससे पहले गूजर समुदाय ने कोई पचास सदस्यों का भारी भरकम प्रतिनिधिमंडल सरकार से बातचीत करने जयपुर भेजा था.

ये दल पिछले दो दिन से सरकार से बातचीत कर रहा था.इसी सिलसिले में बैंसला ने कहा कि बातचीत सही दिशा में जाने की जानकारी मिलने के बाद ही वे जयपुर आए हैं.

क्यों अटका है मामला

गूजर नेता बैंसला ने जयपुर रवाना होने से पहले स्थानीय मीडिया से कहा था,“हमारे प्रतिनिधिओं ने सभी मुद्दों पर सरकार से बातचीत की है. मैं आगे की संभावनाएँ तलाशने जयुपर जा रहा हूँ. मुख्यमंत्री से सभी मुद्दों पर बात करूँगा,मेरा एक ही मकसद है कि कैसे अपनी बिरादरी के हितों को सुरक्षा और सरंक्षण दिला सकता हूँ.”

सरकार ने गूजरों को आरक्षण देने के लिए प्रावधान किया भी था पर इस पर हाई कोर्ट ने रोक लगा दी.

वो इसलिए क्योंकि इससे सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश का उल्लंघन हो रहा था जिसमें कहा गया था कि किसी राज्य में आरक्षण की सीमा पचास फीसद से ज़्यादा नहीं की जा सकती.

राजथान में गूजर और चार अन्य जातियों को अलग से आरक्षण देने से ये सीमा बढ़ कर चौवन हो गई थी.

फिर पिछली भाजपा सरकार ने इसमें आर्थिक रूप से पिछड़ों के लिए भी चौदह प्रतिशत आरक्षण का प्रवधान कर दिया था. इससे राज्य में आरक्षण बढ़ कर अडसठ तक जा पहुंचा था.

हाई कोर्ट ने सरकार ने कहा है कि वो इन समुदायों के पिछड़ेपन का सर्वे कर बताए कि कौन सी जाती कितनी पिछड़ी है.

इसके लिए कोर्ट ने सरकार को एक साल का समय दिया है.मगर गूजर इतनी देर तक धैर्य रखने को तैयार नहीं है. इसी बात पर समझौता अटका हुआ है.

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