गूजरों और सरकार के बीच समझौते की घोषणा

गूजर
Image caption गूजरों ने पिछले कई दिनों से आंदोलन तेज़ कर रखा था

सरकार और गूजरों के बीच आरक्षण के मुद्दे पर समझौता हो गया है और उन्होंने आंदोलन वापस लेने का ऐलान किया है.

सरकार ने उन्हें पाँच फीसद आरक्षण देने का वादा दोहराया है जिसके तहत अभी एक फीसद आरक्षण पहले की तरह यथावत जारी रहेगा.

हाई कोर्ट के निर्देशानुसार गूजर सहित अन्य पिछड़ी जातियों का पिछड़ापन सत्यापित करने का सर्वे छह महीने में पूरा कर लिया जाएगा.

ये सर्वे अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग के सामने पेश किया जाएगा ताकि गूजरों के लिए चार प्रतिशत आरक्षण की सिफारिश की जा सके.

सरकार ने कहा है कि अगर इस सर्वे में कुछ अन्य जातियां भी आर्थिक रुप से पिछड़ी जातियों के रुप में चिह्नित होती हैं तो आयोग की सिफारिश के मुताबिक आरक्षण में बढ़ोतरी की जाएगी.

दोनों पक्षों के समझौते के तहत गूजरों के ख़िलाफ़ दायर मुकदमों पर कार्रवाई क़ानून देखकर की जाएगी.

गूजर नेताओं ने कहा है कि तेलंगाना में भी आंदोलनकारियों को रिहा किया गया है इसी तर्ज़ पर उनके ख़िलाफ़ मुकदमे भी वापस लिए जाएं. सरकार ने कहा कि वो इस पहलू पर भी विचार करेगी.

आंदोलन में घायल हुए लोगों के लिए इलाज की व्यवस्था और स्थायी रुप से अपंग हो गए लोगों को विकलांग पेंशन देने के बारे में भी सरकार ने आश्वासन दिया है.

सरकार ने यह भी कहा है कि आरक्षण दिए जाने के स्थिति में उसे केंद्र को भी भेजा जाएगा ताकि उसे नवीं सूची में शामिल किया जा सके.

गूजर आंदोलन के समाप्त होने से मुंबई दिल्ली रेलमार्ग फिर से शुरु हो सकेगा क्योंकि आंदोलनकारी पिछले 17 दिनों से इस रेललाइन को जाम किए बैठे थे.

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