मनरेगा में नहीं मिल रहा न्यूनतम वेतन

मनरेगा में कामगर
Image caption मनरेगा में न्यूनतम वेतन की मांग

सरकार की महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना या मनरेगा में काम कर रहे लोगों को सरकार ही तय न्यूनतम वेतन नहीं देगी.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 31 दिसम्बर 2010 को राष्ट्रीय सलाहकार समिति की अध्यक्षा सोनिया गांधी को एक पत्र लिख कर कहा है कि मनरेगा कार्यकर्ताओं को न्यूनतम वेतन देना ज़रुरी नहीं.

प्रधानमंत्री का कहना है कि मंत्रिपरिषद में भी इस पर सर्वसम्मति है कि मनरेगा के वेतन नियम सरकार के न्यूनतम वेतन क़ानून से जुड़े हुए नहीं हैं.

मनरेगा में न्यूनतम वेतन की मांग कर रहे समाजसेवी संगठनों का कहना है कि ऐसा कर के सरकार किसी भी क्षेत्र में न्यूनतम वेतन लागू करने का अपना नैतिक अधिकार खो देती है.

श्रमिकों का अधिकार

सवाल ये पूछे जा रहे है कि अगर सरकार ही सही मेहनताना देना नहीं चाह रही तो वो किस मुँह से निजी क्षेत्र को, बड़े कृषकों को, उद्योगपतियों को ऐसा करने के लिए बाध्य कर सकती है.

जहां तक मंत्रिमंडल में सभी की ये राय होने की बात है तो श्रम मंत्रालय ने नवंबर 2010 में कहा था कि न्यूनतम वेतन न देना संविधान का उल्लंघन होगा.

भारत की अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल इंदिरा जयसिंह ने भी कहा था कि अगर मनरेगा के कार्यकर्ताओं को न्यूनतम वेतन नहीं दिया जाता तो ये बंधुआ मज़दूरी जैसा माना जाएगा.

प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में लिखा है, “सरकार 100 रुपये प्रतिदिन की दर से वेतन देने के लिए प्रतिबद्ध हैं जैसा कि 2009 के बजट में घोषणा की गई थी.’’

“मुद्रास्फीति के मद्देनज़र, श्रमिकों की तनख़्वाह पर इसके असर को देखते हुए ये फ़ैसला लिया गया है कि मनरेगा के वेतन को कृषि श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से जोड़ कर देखा जाए पर साथ ही मनरेगा के तहत वेतन और न्यूनतन वेतन क़ानून को अलग अलग रखा जाए.’’

प्रधानमंत्री ने यह भी लिखा था कि ‘‘साथ ही हर राज्य पाँच साल में एक बार वेतन पुनर्निर्धारित करेगा. नई वेतन की घोषणा एक जनवरी 2011 को की जाएगी.’’

महंगाई से जोड़ा जाए

विष्लेशकों का कहना है कि कृषि श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से जोड़ने के बाबजूद बढ़े हुए वेतन की घोषणा नहीं हुई है जबकि जनवरी का पहला हफ्ता समाप्त होने जा रहा है.

नव वर्ष में राजस्थान सरकार ने न्यूनतम वेतन दर 135 रुपये प्रतिदिन तय की है और राज्य सरकार ने कहा हैं कि ये मनरेगा के अलावा सभी श्रमिकों पर लागू होगा. अब जब तक सरकार मनरेगा के तहत महंगाई के मद्देनज़र वेतन को 100 रुपये से बढ़ाने की घोषणा नहीं करती तब तक मनरेगा के तहत काम कर रहे श्रमिक घाटे में रहेंगे.

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