सीबीआई की नीयत पर अदालत का सवाल

ओतावियो क्वात्रोकी
Image caption इससे पहले यूपीए सरकार ने लंदन में क्वात्रोकी के बैंक खातों को खोलने की अनुमति दे दी थी

दिल्ली की एक अदालत ने केंद्रीय जाँच ब्यूरो यानी सीबीआई ने बोफ़ोर्स दलाली में इतालवी नागरिक ओतावियो क्वात्रोकी के ख़िलाफ़ मामले को बंद करने से इनकार कर ही दिया है उल्टे उसने सीबीआई की नीयत पर संदेह जताया है.

अदालत ने दो दशक से भी पुराने इस मामले को बंद करने के सीबीआई के अनुरोध पर कहा है कि इसमें 'कुछ बदनीयति' दिखाई देती है.

इस बीच बोफ़ोर्स दलाली के मामले में सत्तारूढ़ कांग्रेस और मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के बीच बयानबाज़ी तेज़ हो गई है.

एक ओर जहाँ भाजपा ने कांग्रेस पर क्वात्रोकी को बचाने का आरोप लगाया तो कांग्रेस ने कहा कि भाजपा जब सत्तारूढ़ थी तो भी वह इस मामले में कोई सबूत नहीं जुटा सकी और अब वह मरे घोड़े को पीट रही है.

नीयत पर संदेह

दिल्ली की अदालत में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के वकील अजय अग्रवाल ने सीबीआई की उस याचिका का विरोध किया जिसमें सीबीआई ने इस मामले को बंद करने की अपील की थी.

अजय अग्रवाल ने कहा कि उनके पास क्वात्रोकी के ख़िलाफ़ पर्याप्त सबूत हैं और सीबीआई 70 वर्षीय इतालवी वकील को बचाना चाहती है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार इस पर चीफ़ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट विनोद यादव ने कहा, "मैं इस बात से सहमत हूँ कि इस मामले में कोई बदनीयति है, इसमें कोई शक भी नहीं है." मजिस्ट्रेट ने सीबीआई से पूछा, "मैं समझता हूँ कि क्वात्रोकी के बैंक खातों पर से प्रतिबंध हटाने के पीछे भी कई बदनीयतियाँ थीं. लेकिन क्या आप मुझे मौख़िक रुप से ही यह बता सकते हैं कि क्वात्रोकी को यहाँ किस तरह से पेश किया जा सकता है क्योंकि उन्हें प्रत्यर्पित करने की सीबीआई की कोशिशें नाकाम हो चुकी हैं."

सीबीआई की ओर से अदालत में पेश हुए एडीशनल सॉलिसिटर जनरल पीपी मल्होत्रा ने कहा कि आयकर अदालत, इनकम टैक्स अपीलेट ट्राइब्यूनल (आईटीएटी) की टिप्पणी के बाद भी क्वात्रोकी पर चल रहा मामला वापस लेने के मुद्दे पर सरकार का नज़रिया नहीं बदला है.

उन्होंने अदालत से अपील की थी कि वह आईटीएटी के फ़ैसले पर बिल्कुल ध्यान न दें क्योंकि वह एकदम अप्रासंगिक है और उस पर भरोसा करना ग़लत होगा.

उल्लेखनीय है कि आईटीएटी ने अपने फ़ैसले में कहा था कि बोफ़ोर्स तोपों के सौदे में भारतीय व्यापारी विन चड्डा और इतालवी व्यवसायी ओतावियो क्वात्रोकी को 41 करोड़ रुपए दिए गए थे और इन आमदनी पर उन्हें इस पर कर देना चाहिए.

हालांकि सरकारी वकील का तर्क था कि सुप्रीम कोर्ट के वकील अजय अग्रवाल का इस मामले से कोई लेना देना नहीं है और अदालत को सीबीआई की अर्ज़ी पर फ़ैसला देना चाहिए.

लेकिन अदालत ने अजय अग्रवाल का यह अनुरोध स्वीकार कर लिया कि वे सीबीआई के तर्कों का जवाब देना चाहते हैं.

सीबीआई उम्मीद कर रही होगी कि इस महीने की शुरुआत में दाख़िल की गई उसकी याचिका पर फ़ैसला हो जाएगा लेकिन अदालत ने इसे लंबित रखते हुए अजय अग्रवाल को दस फ़रवरी तक का समय दे दिया है.

अदालत ने अजय अग्रवाल को 'व्यापक जनहित में' इस मामले से जुड़े सारे न्यायालयीन दस्तावेजों के अवलोकन की अनुमति भी दे दी है.

ज़ाहिर है कि अभी क्वात्रोकी के ख़िलाफ़ मामला चलता रहेगा.

आरोप प्रत्यारोप

भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर बोफ़ोर्स मामले में दलाली के मामले में क्वात्रोकी को बचाने का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से सफ़ाई मांगी है.

भाजपा के प्रवक्ता शहनवाज़ हुसैन ने कहा, "प्रधानमंत्री और सोनिया गांधी दोनों मिलकर बोफ़ोर्स के दलाल को बचाने की कोशिश कर रहे हैं. कांग्रेस को इस मामले में सफ़ाई देनी चाहिए."

उन्होंने कांग्रेस महासचिव के उस बयान पर भी आपत्ति जताई जिसमें उन्होंने आईटीएटी के फ़ैसले पर सवाल उठाया था.

लेकिन कांग्रेस की ओर से जवाबी हमला करते हुए केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि भाजपा और उसके सहयोगी दल मरे हुए घोड़े को पीट रहे हैं.

उन्होंने कहा कि एनडीए जब सरकार में थी तो वह इस मामले में कोई ठोस सबूत नहीं निकाल सकी.

कपिल सिब्बल ने कहा, "मुझे याद है कि जब एनडीए सत्ता में थी तो एडीशनल सॉलिसिटर जनरल ने हाईकोर्ट में जस्टिस जेडी कपूर की अदालत में कहा था कि किसी आपराधिक षडयंत्र का कोई सबूत नहीं है."

उनका कहना था कि मलेशिया की अदालत ने भी एनडीए की सरकार से सबूत लाने को कहा था लेकिन छह साल की कड़ी मेहनत के बाद भी वे कुछ नहीं तलाश कर सके.

मामला

राजीव गांधी के प्रधानमंत्रित्व काल में स्वीडन की बोफ़ोर्स कंपनी से होवित्ज़र तोपें ख़रीदी गईं थीं और आरोप है कि 1437 करोड़ रुपए के इस सौदे के लिए कोई 64 करोड़ रुपए की दलाली दी गई थी.

सीबीआई ने 1999 में पूर्व रक्षा सचिव एसके भटनागर, क्वात्रोकी, विन चड्ढा और बोफोर्स के पूर्व प्रमुख मार्टिन आर्डबो और बोफोर्स कंपनी के ख़िलाफ़ आरोप दायर किया था.

इनमें एसके भटनागर, मार्टिन आर्डबो और विन चड्ढा का निधन हो चुका है. इस मामले के अभियुक्तों में से सिर्फ़ ओतावियो क्वात्रोकी ही जीवित हैं लेकिन उन्हें आज तक भारत की किसी अदालत में पेश नहीं किया जा सका है.

अब सीबीआई चाहती है कि इस मामले को बंद कर दिया जाए क्योंकि क्वात्रोकी के ख़िलाफ़ कोई सबूत नहीं हैं.

लेकिन विपक्षी दल आरोप लगाते हैं कि चूंकि क्वात्रोकी के गांधी परिवार से नज़दीकी रिश्ते हैं इसलिए सरकार क्वात्रोकी को बचाना चाहती है.

यह भी तथ्य है कि इस विवाद के शुरु होने के बाद से अब तक भारत में कम से कम दो बार ऐसी सरकारें रही हैं जिसमें कांग्रेस शामिल नहीं थीं. एक बार वीपी सिंह की सरकार थी, जो राजीव गांधी के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर ही सत्ता में आई थी. और दूसरी बार भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए की सरकार थी.

लेकिन ये दोनों सरकारें भी इस मामले में कुछ ठोस कार्रवाई नहीं कर सकीं.

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