रेड्डी बंधुओं पर नया संकट

सुप्रीम कोर्ट
Image caption अब सुप्रीम कोर्ट इस रिपोर्ट के आधार पर अपना फ़ैसला देगा

सुप्रीम कोर्ट की पर्यावरण मामलों की समिति सेंट्रल एंपॉवरमेंट कमेटी (सीईसी) ने कर्नाटक के प्रभावशाली रेड्डी बंधुओं को आंध्र प्रदेश में दी गई माइनिंग लीज़ को रद्द करने की सिफ़ारिश की है.

सीईसी का कहना है कि रेड्डी बंधुओं की कंपनी ने पर्यावरण के नियमों का खुला उल्लंघन किया है.

समिति ने आंध्र प्रदेश के अधिकारियों की खिंचाई करते हुए कहा है कि नियमों का उल्लंघन उनकी सांठगांठ के बिना नहीं हो सकता.

आंध्र प्रदेश के इन खदानों में अनियमितता की शिकायत बहुत समय से की जा रही है और इसकी जाँच का काम सीबीआई को सौंपा गया है.

जी जनार्दन रेड्डी और जी करुणाकर रेड्डी कर्नाटक में मंत्री हैं और अपने खनन उद्योंगों और भ्रष्टाचार के आरोपों की वजह से चर्चा में रहे हैं.

कर्नाटक में भी उनके ख़िलाफ़ लोकायुक्त की जाँच चल रही है.

रिपोर्ट

सीईसी ने शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी है.

समिति ने कुल 140 एकड़ में फैले चार विभिन्न माइनों की लीज़ रद्द करने की सिफ़ारिश की है.

अपनी रिपोर्ट में समिति ने लीज़ रद्द करने के जो कारण बताए हैं उसमें कहा गया है कि अधिकारियों ने ग़ैर-क़ानूनी ढंग से लीज़ आगे बढ़ाई, जितने क्षेत्र में माइनिंग होनी थी, उससे ज़्यादा इलाक़े में माइनिंग हुई और इसके अलावा उन्होंने संरक्षित वनों के इलाक़े में अवैध निर्माण का भी कार्य किया.

समिति ने कहा है कि बेल्लारी संरक्षित बन के इलाक़े में जब तक आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के बीच स्पष्ट सीमांकन न हो जाए, रेड्डी बंधुओं को इन चारों खदानों से अयस्क निकालकर ले जाने पर भी रोक लगानी चाहिए.

रेड्डी बंधुओं को आंध्र प्रदेश के दिवंगत मुख्यमंत्री वायएस राजशेखर रेड्डी का क़रीबी माना जाता था और उन्हीं की वजह से आंध्र प्रदेश में रेड्डी बंधुओं को खनन की अनुमति मिली थी.

रेड्डी बंधु हमेशा इस बात से इनकार करते आए हैं कि उन्होंने कोई ग़ैर-क़ानूनी काम किया है.

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