तेलंगाना: स्कूल-कॉलेज बंद, धरने-प्रदर्शन शुरु

Image caption शुक्रवार को तेलंगाना के सभी शिक्षण संस्थानों ने मिलकर बंद का आह्वान किया है.

दक्षिणी राज्य आंध्र प्रदेश में अलग तेलंगाना राज्य की मांग को लेकर सरकार पर दबाव बनाने के लिए तेलंगाना समर्थकों ने अपना आंदोलन तेज़ कर दिया है.

अलग-अलग संगठनों और पार्टियों की ओर से तेलंगाना के कई इलाकों में शुक्रवार को बंद और धरने-प्रदर्शन किए जा रहे हैं.

श्रीकृष्ण समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद विभिन्न राजनीतिक पार्टियां पहले ही अपना विरोध प्रकट कर चुकी हैं.

गुरुवार शाम तेलंगाना के समर्थन में उस्मानिया विश्वविद्यालय के छात्रों का प्रदर्शन उग्र हो गया और पुलिस ने भीड़ को तितर बितर करने के लिए रबर की गोलियां चालाईं.

इसके विरोध में शुक्रवार को तेलंगाना के सभी शिक्षण संस्थानों ने मिलकर बंद का आह्वान किया है.

बंद का आह्वान

छात्रों के इस बंद को तेलंगाना ज्वाइंट एक्शन कमेटी की ओर से समर्थन मिल रहा है.

तेलंगाना क्षेत्र के सरकारी कर्मचारियों ने भी भोजनावकाश के दौरान धरना-प्रदर्शन करने का ऐलान किया है.

इस बीच क्षेत्र की सभी विद्युत इकाईयों के कर्मचारी भी तेलंगाना राज्य के समर्थन में एकजुट होंगे और आंदोलन में हिस्सा लेंगे.

तेलंगाना मामले पर अपनी ही सरकार के खिलाफ़ अनशन कर चुके कांग्रेस के क्षेत्रीय विधायकों ने भी इस मुद्दे पर अपनी आगे की रणनीति तय करने के लिए एक कांग्रेसी सांसदों की एक बैठक बुलाई है.

मुश्किलें

माना जा रहा है कि तेलंगाना को लेकर स्थानीय सांसदों का रुख केंद्र के लिए मुश्किलें पैदा कर सकता है और अब कांग्रेस को इस मामले में अपना रुख साफ करना होगा.

बुधवार को कांग्रेस नेता प्रणब मुखर्जी ने तेलंगाना की कांग्रेस इकाई के सांसदों से बैठक कर उनसे कहा था कि वो इस मामले पर अपनी किसी भी प्रतिक्रिया के ज़रिए केंद्र के लिए शर्मनाक स्थितियां पैदा न करें.

श्रीकृष्ण समिति की रिपोर्ट को ठुकराते हुए तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस), तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) और तेलंगाना क्षेत्र के कई नेताओं ने कहा कि उन्हें पृथक तेलंगाना राज्य के गठन के अलावा कोई विकल्प मंजूर नहीं है.

तेलंगाना राष्ट्र समिति के महासचिव तारका रामराव ने कहा था कि तेलंगाना के लोग उस समय तक आंदोलन चलाएंगे जब तक केंद्र सरकार तेलंगाना राज्य की स्थापना के लिए संसद में विधेयक पेश नहीं कर देती.

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