सोनिया से जुड़े हैं बोफोर्स के तार

Image caption आडवाणी ने सीधे सोनिया पर निशाना साधा

गुवाहाटी में संपन्न हुई भारतीय जनता पार्टी की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में कांग्रेस को हर संभव मंच पर घेरने और भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ विरोध तेज़ करने का फ़ैसला किया गया है.

इस अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की एक रैली में भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने सोनिया गांधी पर आरोप लगाया कि बोफ़ोर्स घोटाले से उनका सीधा संबंध है. आडवाणी ने कहा, "आयकर न्यायाधिकरण ने साफ-साफ कहा है कि बोफोर्स डील में क्वात्रोकी को रिश्वत दी गई थी. सोनिया जी कांग्रेस पार्टी की अध्यक्षा हैं. क्या वो सीबीआई की बात को नकार सकती हैं? क्या वो उस ड्राइवर की बात नकार सकती हैं जिसका कहना है कि क्वात्रोकी का सोनिया गांधी के निवास पर खूब आना-जाना था?"

आडवाणी ने कहा कि घोटालों से भरा साल 2010-2011 भारत के इतिहास में उसी तरह निर्णायक साबित होगा जिस तरह बोफ़ोर्स घोटाले ने 1980 में राजनीति की तस्वीर बदल दी थी.

बोफ़ोर्स मामले में रिश्वत दिए जाने संबंधी कुछ खबरों के सामने आने के बाद भाजपा ने घोषणा की कि वो इस मामले को हरसंभव क़ानूनी मंच पर उठाएगी.

भ्रष्टाचार और महंगाई के मुद्दे पर गुवाहटी में बुलाई गई रैली में एनडीए के नेताओं ने कांग्रेस पर जमकर प्रहार किया. रैली में केंद्र सरकार के स्तर पर ही नहीं बल्कि राज्य सरकार के स्तर पर हो रहे कथित भ्रष्टाचार की तरफ भी लोगों का दिलाने की कोशिश की गई.

टकराव जारी रहने के संकेत

इस रैली में भाग लेने आई आम जनता में खासा जोश देखने को मिला और भाषा का अंतर भी लोगों की जिज्ञासा को रोक नहीं पाया.

भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने कहा, "ये जो भ्रष्टाचार की बारात है, उसमें भले ही दूल्हा ए राजा हों, लेकिन इस बारात में अनेक भ्रष्टाचारी शामिल हैं".

मंच पर मौजूद लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने कहा, "संसद के शीतकालीन सत्र ने ये साबित कर दिया कि कई बार संसद का न चलना, संसद के चलने से ज़्यादा प्रभावी होता है".

पार्टी ने संकेत दिए कि अगर घोटालों को लेकर संयुक्त संसदीय समिति की मांग को स्वीकार नहीं किया गया, तो वो बजट सत्र में भी विरोध जारी रखेगी.

साथ ही असम में गोगोई की कांग्रेस सरकार पर लग रहे आरोपों को भी पार्टी ने जनता के बीच रखा और मुख्यमंत्री गोगोई को चुनौती दी कि वे इन आरोपों को झूठा साबित कर दिखाएँ.

लेकिन जब भ्रष्टाचार के मुद्दे पर ही भाजपा के कर्नाटक के मुख्यमंत्री येदियुरप्पा पर लगे आरोपों के बारे में सवाल किए गए तो पार्टी कोई जवाब नहीं दे पाई.

बढ़ा आत्मविश्वास

2010 में बिहार चुनाव में मिली जीत के बाद भाजपा के मनोबल में खासी मज़बूती देखी जा रही है और पार्टी की नज़र न केवल इस साल होने वाले विधानसभा चुनावों पर है, बल्कि 2014 में होने वाले लोकसभा चुनावों पर भी है.

पार्टी प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा, "जिस तरह से कांग्रेसपोषित भ्रष्टाचार देश पर प्रभावी है, 2010 और 2011 देश के लिए निर्णायक वर्ष साबित होंगें. अगर ये स्थिति बनी रही तो 2014 में भाजपा के अगुवाई में एनडीए सरकार केंद्र में वापस आएगी".

Image caption पार्टी भ्रष्टाचार को मुख्य मुद्दा बनाने का फ़ैसला कर चुकी है

समझौता एक्सप्रेस रेल में धमाके के मामले में भूमिका को लेकर आए स्वामी असीमानंद के बयान के बाद भाजपा बचाव की मुद्रा में नज़र आई.

पार्टी प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कांग्रेस भगवा चरमपंथ का मुद्दा अपने फायदे के लिए उठा रही है. उनका कहना था, "भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ आतंकवाद की संयुक्त राष्ट्र समेत पूरी दुनिया के मंचों पर जितनी भी शिकायतें की हैं उसमें समझौता ब्लास्ट में पाकिस्तानियों के हाथ होने की स्पष्ट रुप से कही है और आज वे इसे भगवा आतंकवाद बता रहे हैं. जहां तक आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई की बात है, तो कांग्रेस उस पर राजनीति नहीं करनी चाहिए".

बात साफ है. भाजपा जनता का ध्यान आरएसएस पर उठ रहे सवालों की ओर नहीं जाने देना चाहती और इसलिए भ्रष्टाचार के मुद्दे के खिलाफ अपनी मुहिम की गति को पार्टी बरकरार रखे हुए है.

आने वाले दिनों में पार्टी की योजना है कि वो जनता को कांग्रेस के भ्रष्टाचार के बारे में जागरूक बनाने के लिए देश भर में अनेक रैलियाँ आयोजित करेगी. और अगर ये मुहिम यूं ही चलती रही तो कांग्रेस की मुश्किलें बजट सत्र में भी बरकरार रहेंगी.

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