जगन रेड्डी की दिल्ली में हड़ताल

जगन रेड्डी
Image caption जगन मोहन ने लगातार कांग्रेस नेतृत्व पर दबाव बनाए रखा है

आंध्र प्रदेश में कांग्रेस सरकार की स्थिरता को एक और तगड़ा झटका उस समय लगा जब पार्टी के विरुद्ध बगावत कर रहे सांसद वाईएस जगनमोहन रेड्डी अपनी लड़ाई कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व के सामने लेकर आ गए.

आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री राजशेखर रेड्डी के पुत्र जगनमोहन ने मंगलवार को दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना दिया और जता दिया कि उनकी चुनौती को कांग्रेस आसानी से नज़र अंदाज़ नहीं कर सकती.

जगन दिल्ली के जंतर मंतर में 24 घंटे के अनशन पर बैठे हैं. कम से कम 24 कांग्रेसी विद्याकाओं और दो सांसदों ने इसका समर्थन किया है.

इस से आंध्र प्रदेश और दिल्ली में कांग्रेस के नेतृत्व में हड़कंप मच गया है. कांग्रेस के इतने सारे विधायक पार्टी की तरफ से कारवाई के चेतावनी की अनदेखी करते हुए जगन के साथ दिल्ली में जमा हुए हैं.

कहने को तो जगन किसानों की समस्याओं को लेकर और कृष्णा नदी के पानी के बटवारे के विषय पर भूख हड़ताल पर बैठे हैं लेकिन यह बात किसी की नज़र से छुपी नहीं है कि उनका असल निशाना कांग्रेस का केन्द्रीय नेतृत्व विशेष कर पार्टी अध्यक्ष सोनिया गाँधी हैं.

जगन की कोशिश है कि वो कांग्रेस को ये जता दे कि कांग्रेस ने उनके पिता वाईएसआर की मौत के बाद उन्हें मुख्यमंत्री न बनाकर एक बड़ी गलती की है.

जगन ने दिल्ली में कहा कि अगर वो चाहें तो इसी समय आंध्र प्रदेश में कांग्रेस की सरकार को गिरा सकते हैं.

उन्होंने कहा कि वो एक शरीफ आदमी हैं और सरकार को गिराना नहीं चाहते.

उनका कहना था, ‘‘ मैं अगर चाहूं तो अभी अपने समर्थक विधायकों को त्याग पात्र देने के लिए कह सकता हूँ जिस से राज्य सरकार गिर जाएगी लेकिन मैं ऐसा नहीं करूंगा.’’

यह बात ग]लत भी नहीं है. 294 सदस्यों वाले विधान सभा में कांग्रेस के केवल 156 सदस्य हैं जो साधारण बहुमत से केवल 8 अधिक है. अगर जगन के सारे समर्थक विधायक त्याग पात्र देदेते हैं तो नल्लारी किरण कुमार रेड्डी की सरकार अल्पमत में आ जाएगी.

जगन के खेमे का दावा है कि दिल्ली में जमा होने वाले 24 विधायकों के अलावा उन्हें छह और विधायकों का समर्थन भी प्राप्त है.

कांग्रेस को इस बात से भी झटका लगा है की लोक सभा के दो और सदस्य राजमोहन रेड्डी और सब्बम हरी भी जगन के साथ खड़े हैं.

कांग्रेस के सूत्रों का कहना है की पार्टी अपनी जवाबी रणनीति तैयार कर रही है. इससे पहले कि जगन के समर्थक विधायक पार्टी की सरकार के लिए कोई खतरा बन जाएँ पार्टी उन के खिलाफ़ कारवाई कर सकती है और उनकी विधान सभा की सदस्यता रद्द करवा सकती है.

जगन की चुनौती कांग्रेस के लिए ऐसे समय में आई है जब पार्टी तेलंगाना की समस्या पर जूझ रही है.

तेलंगाना से सम्बन्ध रखने वाले कांग्रेस क विधायक और सांसदों ने बार बार यह धमकी दी है की अगर संसद में तेलंगाना का बिल नहीं लाया गया तो वो त्याग पत्र दे देंगे.

इस समय हैदराबाद में तेलंगाना कांग्रेस के नेताओं की बैठक चल रही है जिसमें वो अपनी आगे की रणनीति तैयार कर रहे हैं.

एक तरफ़ जगन और दूसरी तरफ़ तेलंगाना की चुनौतियों के चलते ऐसा लगता है कि आंध्र प्रदेश राजनैतिक अस्थिरता के कगार पर खड़ा है और ऐसी अटकलें अभी से शुरू हो गई हैं की आंध्र प्रदेश में कुछ समय के लिए राष्ट्रपति शासन भी लग सकता है.

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