'राजखोवा बातचीत के लिए तैयार'

अरबिंद राजखोवा
Image caption अरबिंद राजखोवा जेल से छूट चुके हैं

असम के अलगाववादी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ़्रंट ऑफ़ असम (उल्फ़ा) ने सरकार के साथ बातचीत शुरू करने की पेशकश की है. अधिकारियों ने यह जानकारी दी है.

अधिकारियों के मुताबिक़ उल्फ़ा प्रमुख अरबिंद राजखोवा ने राज्य के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई को पत्र लिखकर बातचीत शुरू करने की इच्छा व्यक्त की है.

रविवार रात असम के प्रमुख त्यौहार बिहू के मौक़े पर पत्रकारों के साथ बातचीत में मुख्यमंत्री गोगोई ने इस बारे में जानकारी दी है.

उन्होंने कहा, "मुझे अरबिंद राजखोवा का एक पत्र मिला है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि उल्फ़ा सरकार के साथ बातचीत करना चाहता है. लेकिन अभी उन्हें औपचारिक फ़ैसला करना है और इसका इंतज़ार कर रहे हैं."

मुख्यमंत्री गोगोई ने बताया कि उल्फ़ा की केंद्रीय समिति की जल्द ही बैठक होगी और वे इस मुद्दे पर औपचारिक निर्णय करेंगे.

इंतज़ार

उन्होंने बताया कि उल्फ़ा अपने पूर्व महासचिव अनूप चेतिया की वापसी का इंतज़ार कर रहा है, जो बांग्लादेश में अपनी सज़ा पूरी कर चुके हैं और भारत भेजे जाने का इंतज़ार कर रहे हैं.

मुख्यमंत्री गोगोई के मुताबिक़ चेतिया ने राजखोवा से शांति प्रक्रिया के समर्थन की बात कही है. इसलिए उल्फ़ा चाहता है कि वे भी इस प्रक्रिया में हिस्सा लें.

राजखोवा से संपर्क की कोशिश नाकाम हो गई क्योंकि वे अपने परिवार के साथ छुट्टियाँ बिता रहे हैं.

हालाँकि नागरिक मध्यस्थता समिति जातियो अबिबर्थन के नेता हिरण्य भट्टाचार्य ने बीबीसी को बताया कि शांति प्रक्रिया पटरी पर है, हालाँकि इसे पटरी पर लाने में थोड़ा समय लगा.

उन्होंने कहा, "हम अपनी मांगों का एक चार्टर बनाएँगे, जो उल्फ़ा नेतृत्व को भेजा जाएगा. इसके बाद इसे सरकार के पास विचारार्थ भेजा जाएगा. इस चार्टर में असम की जनता की भावनाओं को शामिल किया जाएगा."

क़रीब 31 साल पहले असम की आज़ादी की मांग को लेकर उल्फ़ा का गठन हुआ था. लेकिन विभाजन, नेताओं के छोड़कर जाने और भूटान-बांग्लादेश की कार्रवाई के कारण संगठन कमज़ोर होता गया.

रुख़

भूटान-बांग्लादेश की कार्रवाई की उल्फ़ा के कई नेता पकड़े गए और फिर उन्हें भारत भी भेजा गया.

पिछले एक साल के दौरान बांग्लादेश में अरबिंद राजखोवा और अन्य शीर्ष नेता पकड़े गए. इसके बाद भारतीय मध्यस्थ पीसी हलधर के साथ उनकी गहन बातचीत भी हुई.

इसी के बाद बातचीत का प्लेटफ़ॉर्म तैयार हुआ.

लेकिन उल्फ़ा के कट्टरपंथी सैनिक इकाई के प्रमुख परेश बरुआ और उनके कुछ क़रीबी लोगों ने सामने न आने का फ़ैसला किया और सशस्त्र अलगाववादी आंदोलन जारी रखने का फ़ैसला किया.

बिहू के मौक़े पर ईमेल पर भेजे अपने बयान में परेश बरुआ ने असम के नागरिकों को बधाई दी और चेतावनी दी कि भारत उनके बड़े आंदोलन को नष्ट करने की साज़िश कर रहा है.

उन्होंने कहा कि वे बातचीत में तभी शामिल होंगे, जब भारत एजेंडे में असम की संप्रभुता का मुद्दा भी रखेगा.

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