जयपुर में शुरु हुआ साहित्य का मेला

जयपुर सम्मेलन
Image caption जयपुर में शुरु हो गया साहित्य समागम

जयुपर साहित्य समागम शुक्रवार को शुरु हो गया है. राजस्थान के मुख्य मंत्री अशोक गहलोत ने इसका उदधाटन किया.

ये एशिया प्रशांत क्षेत्र में प्रमुख साहित्यिक मेले के रुप में मशहूर हो गया है. इसके लिए दुनियाभर से लेखक, साहित्यकार और संगीत से जुड़ी हस्तियां जयपुर पहुंच रही है.

पाँच दिन चलने वाले इस साहित्यक मेले में पाकिस्तान और आस पड़ोस के साहित्यकार भी भाग लेंगे.

ये छठा ऐसा समागम है जिसमे अदब के लोग साहित्य और इससे जुड़ी ज़िन्दगी के रंगों पर बातचीत करेंगे. इस समारोह का विस्तार देखकर कार्यक्रम स्थल 'डीगी पैलस' में आयोजकों ने बहुत बदवाल किए हैं और ऐसी तैयारियां की है कि यहाँ एक समय में लगभग साढ़े सात हज़ार लोग कार्यक्रम का आनंद ले सकेंगे.

बड़े नाम, बड़ा जमावड़ा

इस बार इस फ़ेस्टिवल में 30,000 लोगों के आने का अनुमान है. छह साल पहले कोई दर्जन भर लेखक इसमें शामिल हुए थे. फिर जो सिलसिला शुरु हुआ तो वो बढ़ता ही चला गया. सलमान रशदी, इयान मैक्वान, विलियम डारलिंपल, हनीफ़ क़ुरेशी समेत कई प्रमुख लेखक इससे जुड़े.

समागम के लिए इस बार नोबेल पुरस्कार विजेता ओरहान पामुक और उनकी मित्र साहित्यकार किरण देसाई जयपुर में हैं.

आयोजन से जुड़े संजोय रॉय ने बीबीसी को बताया कि इस बार इस मेले में शिरकत करने वाले साहित्यकारों और लेखकों की तादाद बढ़ कर 223 तक जा पहुंची है. इसमें से पैंसठ भारत के बाहर से आ रहे है.

इस समागम में कोई 85 संगीतकार भी शिरकत करेंगे. भारत से अदब और सिनेमा से गुलजार और जावेद अख़्तर जैसी हस्तियां इस सहित्यिक समागम में भाग लेंगी.

आयोजकों ने इस बार इस समारोह में आंचलिक और प्रादेशिक देसज साहित्य को भी मौका देने का प्रयास किया है.

विवाद

इस बीच एक भारतीय पत्रकार हरतोश सिंह बाल के इस लेख पर विवाद पैदा हो गया है कि इस साहित्यिक समागम में अंग्रेज़ लेखकों को प्राथमिकता दी जाती है.

हालांकि फ़ेस्टिवल के निदेशक विलियम डारलिंपल ने इसे बेतुका बयान बताया है और कहा है कि बाल का लेख नस्ली भावना से प्ररित है.

पर इस विवाद के मर्म में जो सवाल है वो ये कि क्या ये समागम अंग्रज़ी में लिखने वाले, या अंग्रेज़ी साहित्यकारों के अनुमोदित लेखकों के लिए है या भारतीय भाषा के लेखकों के लिए.

अब माना जा रहा है कि शायद इस समागम में साहित्य के अलावा इस विवाद की भी चर्चा गर्म रहेगी.

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