कुलपति पर बरसे मुसलमान नेता

देवबंद में स्थित दारूल उलूम देश के अग्रणी इस्लामिक वैचारिक संस्थानों में से है.

गुजरात के मुसलमानों पर दारूल उलूम देवबंद के कुलपति के बयान को कई मुसलमान नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट देने के प्रयास के तौर पर देख रहे हैं.

इस्लामी विश्विविद्यालय दारूल उलूम देवबंद के कुलपति ग़ुलाम मोहम्मद वस्तानवी ने कहा है कि गुजरात में मुसलमानों की स्थिति काफ़ी बेहतर है और अब समय आ गया है कि मुसलमान अतीत को भुलाकर आगे बढ़ें.

वस्तानवी देवबंद के सौ वर्ष के इतिहास में वहां के कुलपति बनने वाले पहले गुजराती कुलपति हैं. कई प्रमुख मुस्लिम नेताओं ने उनके बयान की कड़ी निंदा की है.

हैदराबाद के लोकसभा सदस्य असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि वस्तानवी के बयान को मुस्लिम समुदाय कभी स्वीकार नहीं कर सकता क्योंकि उनकी नज़र में मोदी सैंकड़ों मुसलमानों की हत्या के लिए ज़िम्मेदार हैं.

वस्तानवी शायद भूल गए हैं कि वो गुजरात के किसी मदरसे के प्रमुख नहीं बल्कि विश्व की सब से बड़ी इस्लामी विश्वविद्यालय के प्रमुख हैं

असदुद्दीन ओवैसी, हैदराबाद से लोकसभा सदस्य

राष्ट्रीय स्तर पर भी मुस्लिम समुदाय की राजनीति में काफी दखल रखने वाले ओवैसी ने आरोप लगाया है कि वस्तानवी का बयान उस अभियान का हिस्सा हो सकता है जो 2014 के चुनाव में मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाकर पेश करने के लिए चलाया जा रहा है.

उनका कहना था, "वस्तानवी शायद भूल गए हैं कि वो गुजरात के किसी मदरसे के प्रमुख नहीं बल्कि विश्व की सब से बड़ी इस्लामी विश्वविद्यालय के प्रमुख हैं.”

उन्होंने दारुल उलूम के बुज़ुर्गों से कहा कि वो वस्तानवी के बयान से होने वाले नुकसान की भरपाई करने के लिए कार्रवाई करें.

उनका कहना था कि गुजरात में मुसलमानों के हालात अच्छे कैसे हो सकते हैं जब केंद्रीय जांच ब्यूरो ने भी कहा है कि सोहराबुद्दीन हत्या केस दूसरे राज्य में चलाया जाए क्योंकि गुजरात की अदालत में इंसाफ़ नहीं मिल सकता.

उन्होंने कहा कि गुजरात के दंगो के शिकार लोग अभी भी राहत कैंपों में पड़े है और दंगों के कई मुकदमे दूसरे राज्यों में चलाए जा रहे हैं.

गुजरात दंगों का मामला आठ साल पुराना है और अब हमें आगे की तरफ देखना चाहिए

वस्तानवी

एक वरिष्ट धार्मिक नेता और उच्च इस्लामिक शिक्षा केंद्र के प्रमुख मौलाना ख़ालिद सैफ़ुल्ला रहमानी ने भी वस्तानवी के बयान पर दुःख व्यक्त करते हुए कहा कि मोदी भारत के धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र पर एक धब्बा हैं और मुसलमान उन्हें कभी माफ़ नहीं कर सकते.

मौलाना रहमानी ने बीबीसी से कहा, “न केवल मोदी ने मुसलमानों की हत्या की है बल्कि आज भी उन्हें उस पर कोई खेद नहीं है. अगर मोदी बदले हैं तो फिर उन्हें मुस्लिम समुदाय से माफ़ी मांगनी चाहिए और अपना अपराध स्वीकार करना चाहिए.”

मौलाना रहमानी ने कहा कि ज़ालिम का समर्थन करना ज़ुल्म के शिकार व्यक्ति के साथ और भी बड़ा अन्याय है इसलिए मोदी के समर्थन को स्वीकार नहीं किया जा सकता.

वस्तानवी सूरत के रहने वाले हैं और गुजरात और महाराष्ट्र के सीमावर्ती इलाकों में कई शिक्षा केंद्र भी चलाते हैं. उन्होंने एमबीए की डिग्री भी हासिल की है.

वस्तानवी देवबंद के पहले गुजराती कुलपति हैं.

वो देवबंद के छात्र नहीं रहे हैं और कुछ लोगों ने उनकी नियुक्ति पर सवाल उठाए थे. कुछ तबकों का ये भी कहना है कि वो जमियत उल उलेमा-ए-हिंद की अंदरूनी फूट और चाचा अरशद मदनी और भतीजे महमूद मदनी की आपसी लड़ाई के कारण ही इस पद पर पहुँच सके हैं.

उत्तर प्रदेश के देवबंद में स्थित दारुल उलूम देश के अग्रणी इस्लामिक वैचारिक संस्थानों में से एक माना जाता है.

वस्तानवी ने अख़बारों को दिए बयान में कहा था, “गुजरात दंगों का मामला आठ साल पुराना है और अब हमें आगे की तरफ देखना चाहिए'”

उन्होंने कहा, “गुजरात या विश्व के किसी भी हिस्से में अगर दंगा होता है, तो वह मानवता के नाम पर काला धब्बा है और ऐसी घटनाओं पर पूरी तरह से रोक लगनी चाहिए. गुजरात दंगे से भारत की छवि खराब हुई है और इसके लिए जो लोग दोषी हैं, उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए. ’’

अख़बारों के अनुसार वस्तानवी ने कहा था “गुजरात में उतनी समस्याएं नहीं है, जितना कि कहा जा रहा है. दंगे इसलिए ज्यादा भयावह हो गए क्योंकि राजनीतिक दबाव में पुलिस ने इसे रोकने के लिए ज़रूरी कदम नहीं उठाए.”

उन्होंने दंगा पीड़ितों के लिए चलाए जा रहे राहत कार्यों पर संतोष जताया और कहा कि सरकार और गुजरात के लोग इस मामले में काफी बेहतर कार्य कर रहे हैं.

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