बांदा बलात्कार मामले में चार निलंबित

पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी
Image caption अभियुक्त विधायक जेल में हैं

उत्तर प्रदेश सरकार ने बांदा के बहुचर्चित बलात्कार कांड के सिलसिले में चौतरफ़ आलोचना को देखते हुए पुलिस और जेल के चार और जूनियर अधिकारियों को निलंबित कर दिया है लेकिन ज़िले के पुलिस अधीक्षक को निर्दोष बताया है.

मुख्यमंत्री मायावती ने एक प्रेस कॉंफ्रेंस में बताया कि बलात्कार मामले की जांच करने वाले पुलिस सब इन्स्पेक्टर राधे श्याम शुक्ल को निलंबित कर दिया गया है. थाना इंचार्ज अब्दुल जब्बार पहले ही निलंबित कर दिए गए थे.

मामले की जांच कर रही सीआईडी ने बहुजन समाज पार्टी विधायक पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी समेत चार अभियुक्तों के खिलाफ़ अदालत में चार्ज शीट दाखिल कर दी है.पुलिस सर्किल अफ़सर राजेन्द्र यादव और बांदा के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लाला राम को लापरवाही और सुपरविज़न में ढिलाई के आरोप में निलंबित किया गया है.

मुख्यमंत्री ने बताया, "बांदा के जेलर ज्ञान प्रकाश को इसलिए निलंबित किया गया क्योंकि उन्होंने अपने मातहत कर्मचारियों से मिली जानकारी को गंभीरता से नहीं लिया और न ही मामले की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी.इन सभी निलंबित अधिकारियों के खिलाफ़ विभागीय कार्रवाई शुरू हो गई है."

मुख्यमंत्री के अनुसार,"पीड़ित युवती शीलू ने एक बंदी रक्षक को अपने साथ हुई दुराचार की घटना की जानकारी दी थी. इस महिला जेल बंदी रक्षक ने खुले आम आरोप लगाया था कि उसने शीलू की डॉक्टरी जांच के लिए कहा था, लेकिन अफ़सरों ने उसे डाँटकर मामला दबाने को कहा."

उत्तर प्रदेश सरकार ने इस तरह चार जूनियर अधिकारियों को तो निलंबित कर दिया , लेकिन बांदा के पुलिस कप्तान अनिल दास का बाल बांका नहीं हुआ.

पीड़ित युवती ने बयान दिया है कि पुलिस कप्तान जेल में उसके पास कई घंटे रहे और रुपए का लालच देते हुए विधायक पर बलात्कार का आरोप वापस लेने का दबाव डाला.

शीलू उस समय विधायक के परिवार द्वारा लिखाए गए चोरी के एक फर्ज़ी मुकदमे में जेल में थी. बाद में हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप कर उसे रिहा करने का आदेश दिया और पुलिस ने उसे चोरी के आरोप से मुक्त कर दिया.

नियमों के मुताबिक़ कोई पुलिस अधिकारी अदालत की अनुमति के बिना किसी बंदी से जेल में नहीं मिल सकता.

बांदा से कांग्रेस विधायक विवेक कुमार सिंह ने पुलिस कप्तान को जेल में मौजद पाकर वाहन के रजिस्टर में यह बात दर्ज कर दी थी और अदालत तथा सरकार से उनके खिलाफ़ कार्रवाई की मांग की थी.

लेकिन मुख्यमंत्री मायवती ने कहा,“ जहां तक इस मामले में बांदा के पुलिस अधीक्षक की भूमिका का सवाल है , इस मामले की जांच कराई गई जिसमें अब तक उनका कोई दोष नहीं पाया गया है.''

इस बीच बांदा से जानकारी मिली है कि सीबीसीआईडी ने विधायक समेत चार अभियुक्तों के खिलाफ़ अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है.

विधायक के परिवार की दलील

इस बीच विधायक की पत्नी आशा देवी और बेटे मयंक द्विवेदी ने लखनऊ में एक प्रेस कॉंफ्रेंस करके आरोप लगाया कि उनके राजनीतिक विरोधी साज़िश के तहत इस मामले में विधायक को फंसा रहे हैं.

उनका कहना है कि जेल में बंद होने के एक दिन बाद ( १५ दिसंबर को ) मध्य प्रदेश की पुलिस ने वहाँ दर्ज एक मामले में शीलू का बयान दर्ज किया था , जिसमें उसने अपने साथ बलात्कार का ज़िक्र न करके अपने पिता के खिलाफ़ शिकायत की थी.

शीलू मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में अपनी मौसी के गाँव हरनामपुर में रह रही थी. शीलू के परिवार ने एक दबंग द्वारा उसके अपहरण का मुकदमा लिखाया गया था.

शीलू का आरोप है कि उसके साथ बन्दूक की नोक पर बलात्कार हुआ था. इस मामले की जांच मध्य प्रदेश पुलिस कर रही थी.

विधायक की पत्नी आशा देवी का कहना है कि उसके पति लंबे अरसे से शूगर और रक्तचाप के मरीज़ हैं और वह शारीरिक रूप से बलात्कार करने में समर्थ नही हैं.

आशा देवी ने अपने पति के मेडिकल जांच और डीएनए टेस्ट की मांग दोहराई.

बेटे मयंक द्विवेदी का कहना है कि बसपा ने 17 दिसंबर को उनके पिता को बांदा से विधान सभा चुनाव का टिकट फाइनल कर दिया , इसके बाद उनके विरोधियों ने उनको इस मामले में फंसाने का षड्यंत्र रचा.लेकिन पत्रकारों द्वारा कई बार पूछने पर भी उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया.

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