क्यों दूँ इस्तीफ़ा: येदुरप्पा

बीएस येदुरप्पा
Image caption भ्रष्टाचार के मामलों की जाँच लोकायुक्त और एक न्यायिक समिति पहले से ही कर रही है

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदुरप्पा ने कहा है कि ज़मीन घोटाले और भ्रष्टाचार के मामले में मुक़दमा चलाए जाने की राज्यपाल की अनुमति देने के आधार पर वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा नहीं देंगे.

एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में जब उनसे पूछा गया कि क्या वे इस्तीफ़ा देंगे तो उन्होंने पलटकर पूछा, "क्यों दूँ इस्तीफ़ा, भारत में यदि किसी के शिकायत कर देने भर से कोई इस्तीफ़ा दे देता है क्या? तो मैं इस्तीफ़ा क्यों दे दूँ?"

हालांकि वे इस सवाल को टाल गए कि चारा घोटाले में लालू प्रसाद यादव ने तो मुख्यमंत्री का पद छोड़ दिया था.

कर्नाटक के इस मामले को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है.

भाजपा अध्यक्ष ने चीन यात्रा के दौरान दोहराया है कि येदुरप्पा ने जो किया वह ग़ैरक़ानूनी तो नहीं है लेकिन वह अनैतिक है और ठीक नहीं है.

लेकिन भाजपा प्रवक्ता ने अपने अध्यक्ष के इस बयान को दरकिनार करते हुए राज्यपाल पर राजनीति से प्रेरित होने की माँग की है.

दूसरी ओर कांग्रेस के नेताओं ने राज्यपाल के फ़ैसले का बचाव किया है.

इस बीच राज्यपाल की अनुमति के एक दिन बाद ही दो वकीलों श्रीरंजन बाशा और केएन बलराज ने ज़मीन घोटाले के मामले में मुख्यमंत्री बीएस येदुरप्पा के ख़िलाफ़ मुक़दमा दायर कर दिया है. जिस पर सुनवाई 24 जनवरी को होगी.

राज्यपाल ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाने की अनुमति दे दी थी जिसके बाद शनिवार को राज्य में भाजपा ने बंद का आह्वान किया था. कई शहरों से बंद के दौरान हिंसा की ख़बरें मिली हैं और जनजीवन प्रभावित हुआ.

'अनैतिक'

वैसे भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने ये पहली बार नहीं कहा है कि येदुरप्पा ने जो कुछ किया वह अनैतिक है क्योंकि इससे पहले दिसंबर में भी उन्होंने एक से अधिक बार कहा था कि मुख्यमंत्री ने जो कुछ किया वह अनैतिक था, ग़ैरक़ानूनी नहीं.

गडकरी इस समय पाँच दिनों की चीन यात्रा पर हैं और वहाँ भारतीय पत्रकारों से चर्चा करते हुए सिर्फ़ इसे दोहराया है.

Image caption नितिन गडकरी ने पहले भी येदुरप्पा की कार्रवाई को अनैतिक कहा था लेकिन उन्हें पद से हटाने से इनकार कर दिया था

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार उन्होंने कहा, "ज़मीन की अधिसूचना वापस लेना क़ानूनन मुख्यमंत्री का अधिकार है और उन्होंने कुछ भी ग़लत नहीं किया. येदुरप्पा से पहले मुख्यमंत्री के रुप में कुमारस्वामी, धरमसिंह और एसएम कृष्णा ने भी ऐसा किया था लेकिन तब राज्यपाल ने कोई कार्रवाई नहीं की क्योंकि वे कांग्रेस के सदस्य थे."

उन्होंने कहा, "भाजपा ऐसा मानती है और व्यक्तिगत रुप मैं मानता हूँ कि उनके (मुख्यमंत्री के) बेटे के लिए ज़मीन की अधिसूचना वापस लेना, हालांकि ग़ैरक़ानूनी नहीं है लेकिन नैतिकता के आधार पर यह ठीक नहीं है. मैं मानता हूँ कि यह ठीक नहीं है और अनैतिक है..."

उन्होंने पूछा कि यदि यह ठीक नहीं था तो क्यों इससे पहले के राज्यपालों ने तब के मुख्यमंत्रियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं की.

उन्होंने भाजपा के पुराने आरोप को दोहराते हुए कहा कि राज्यपाल का निर्णय राजनीति से प्रेरित है और वे कांग्रेस के दिशा निर्देशों के आधार पर काम कर रहे हैं.

भाजपा अध्यक्ष ने कहा, "पहले कांग्रेस की सबसे विश्वसनीय सहयोगी सीबीआई थी लेकिन अब सबसे विश्वसनीय सहयोगी राज्यपाल हैं. वे संस्थाओं का दुरुपयोग कर रहे हैं और देश में लोकतांत्रिक समस्याएँ पैदा कर रहे हैं."

कांग्रेस राज्यपाल के समर्थन में

एक ओर भारतीय जनता पार्टी कह रही है कि जो भी क़दम राज्यपाल उठा रहे हैं वह असंवैधानिक है और वह इसके ख़िलाफ़ न्यायालय में भी जाएगी और राष्ट्रपति से भी गुहार लगाएँगे.

दूसरी ओर कांग्रेस ने राज्यपाल के निर्णय का समर्थन किया है.

केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम ने राज्यपाल के निर्णय का समर्थन करते हुए कहा है कि यह कोई पहला मामला है जब किसी राज्यपाल ने किसी मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने की अनुमति दी हो.

उन्होंने कहा कि इस मामले में क़ानूनी प्रावधान स्पष्ट हैं. उन्होंने कर्नाटक के लोकायुक्त संतोष हेगड़े के उस बयान की ओर ध्यान दिलाया जिसमें उन्होंने कहा था कि राज्यपाल के पास मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई की अनुमति देने का अधिकार है.

दूसरी ओर क़ानून मंत्री वीरप्पा मोइली ने भी राज्यपाल का बचाव करते हुए कहा है कि यदि मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ कोई सबूत न हो तब तो राज्यपाल की कार्रवाई पर सवाल उठाए जा सकते हैं.

उनका कहना है कि राज्यपाल ने क़ानूनी कार्रवाई की अनुमति देने के पहले राज्य सरकार से सारे दस्तावेज़ मंगाए थे और सारे आरोप सही पाए गए.

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