अधूरी रह गई यह इच्छा...

चित्तौड़ के लोगों की यह इच्छा पूरी हो पाती इससे पहले ही शास्त्री जी का ताशकंद में निधन हो गया.

भारत को 'जय जवान जय किसान' का नारा देने वाले दिवंगत प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के कुंदन समान व्यक्तित्व को सम्मान देने के लिए राजस्थान को लोग उन्हें सोने से तोलना चाहते थे.

इसके लिए लोगों ने चित्तौड़ में लगभग 67 किलो सोना जमा किया. मगर वो लम्हा कभी नहीं आया जब लोग अपने इस रहनुमा को सोने से तोलते. अब हाई कोर्ट ने ये सोना उनके मालिकों को वापस लौटाने का आदेश दिया है.

ये सोना कोई 44 साल तक सरकारी खजाने में पड़ा रहा. सर्राफ़ा बाज़ार में इस सोने की कीमत अब 13 करोड़ रूपए से ज़्यादा आंकी जा रही है.

ताशकंद में निधन

ये वो दौर था जब राजनीति में नैतिकता का परचम बहुत ऊँचा था. आदर्शों के इस दौर में चित्तौड़ के धनी लोगों ने तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को उनके वज़न के मुक़ाबले सोने से तोलने का ऐलान किया.

ये वो दौर था जब राजनीति में नैतिकता का परचम बहुत ऊँचा था. आदर्शों के इस दौर में चित्तौड़ के धनी लोगों ने तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को उनके वज़न के मुक़ाबले सोने से तोलने का ऐलान किया.

लोगो ने लगभग 67 किलो सोना जमा किया और एक खेत में रख दिया. स्वर्गीय शास्त्री जी का तब चित्तौड़ आने का कार्यक्रम था. मगर इसी दौरान शास्त्री जी का ताशकंद में निधन हो गया.

तब ज़िला प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज़ से इस सोने को अपने कब्ज़े में ले लिया था और तब से ये सरकारी कोष की शोभा बना हुआ है.

हम पता लगा लगा रहे हैं कि सरकारी कोष में यह सोना कहाँ रखा है और रिकॉर्ड देख रहे हैं. जो भी अदालत का आदेश होगा उसका पालना किया जाएगा.

केंद्रीय उत्पाद शुल्क विभाग

अब लंबी कानूनी लड़ाई की कार्रवाई के बाद हाईकोर्ट ने ये सोना उसके असल मालिकों को लौटाने का आदेश दिया है.

समर्थकों की श्रद्धा

चित्तौड़ के केंद्रीय उत्पाद शुल्क विभाग के अधिकारियों ने बीबीसी को बताया कि हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक ये सोना उसके दावेदारों को लौटा दिया जाएगा.

उदयपुर के ज़िला कलेक्टर हेमंत गेरा ने बीबीसी को बताया कि प्रशासन को इस बाबत उत्पाद विभाग की चिठ्ठी मिली है.

उन्होंने कहा, ''हम पता लगा लगा रहे हैं कि सरकारी कोष में यह सोना कहाँ रखा है. रिकॉर्ड देख रहे हैं और जो भी अदालत का आदेश होगा उसका पालन किया जाएगा.

भारत में कई नेताओं के समर्थक उन्हें मूल्यवान वस्तुओं से तोलते रहते हैं. कोई सिक्कों से तुलता है, कोई लड्डुओं से! पर मरहूम शास्त्री जी पर सोना क़ुर्बान करने वाले लोग ये जरूर सोचते होंगे कि काश आज भी कोई नेता ऐसा होता जिसे वो सोने से तोल पाते.

अवाम की श्रद्धा तो शायद वैसी ही है सोना भी है, मगर उनके पास कोई लाल बहादुर शास्त्री नहीं हैं.

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