पॉस्को को सशर्त मंज़ूरी

पॉस्को
Image caption पॉस्को ने उड़ीसा में ज़बर्दस्त निवेश किया है.

केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने दक्षिण कोरियाई कंपनी पॉस्को के 12 अरब डॉलर के स्टील प्लांट को सशर्त मंज़ूरी दे दी है.

उल्लेखनीय है कि पॉस्को के ख़िलाफ़ पर्यावरण नियमों के उल्लंघन संबंधी कई आरोप लगे थे.

पॉस्को को यह अनुमति ऐसे समय में मिली है जब इस साल पर्यावरण मंत्रालय ने देश भर में कई बड़ी परियोजनाओं पर रोक लगाई है.

पॉस्को के बारे में कहा जा रहा था कि कंपनी के कारण हज़ारों की संख्या में गरीब लोगों की आजीविका खतरे में पड़ सकती है.

मंत्रालय ने पॉस्को पर 29 शर्तें लगाई हैं जिसे पॉस्को को मानना पड़ेगा. हालांकि ये शर्तें कठिन नहीं है. इनमें कई शर्तें वो हैं जो कोई कंपनी कारपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत निभाती हैं.

नई शर्तों के अनुसार पॉस्को को साफ वायु, हरित क्षेत्र संबंधी नियमों को भी मानना होगा. मंत्रालय ने पॉस्को के छोटे बंदरगाह को भी सशर्त मंजूरी दी है जो पाराद्वीप से गोपालपुर समुद्र तट के बीच है. इनमें मंजूरी के लिए 32 शर्तें लगाई गई हैं.

इन शर्तों के तहत राज्य सरकार पर्यावरण मंत्रालय के साथ एक करार करेगी जिसमें सुनिश्चित होगा कि पॉस्को वन संरक्षण अधिनियम का पालन करेगा.

मंत्रालय का कहना है कि सरकार ने पॉस्को पर ये शर्तें इसलिए लगाई हैं जिससे बड़ी परियोजनाओं को लागू करने वाली कंपनियां पर्यावरण नियमों को गंभीरता से लें.

मंत्रालय के अनुसार स्टील प्लांट पर 28 शर्तें, बंदरगाह पर 32 शर्तें और वन संरक्षण कानून लागू करने के मामले में राज्य सरकार का वादा ये सुनिश्चित करेगा कि पॉस्को से पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं हो रहा है.

सरकार इस पर नज़र रखेगी कि पॉस्को इन शर्तों को मान रहा है या नहीं.

पॉस्को ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के फ़ैसले का स्वागत किया है और कहा है कि वो पर्यावरण और प्रभावित परिवारों की आजीविका पर जताई गई चिंताओं से अवगत हैं.

पॉस्को ने एक बयान जारी कर के कहा है कि कंपनी ज़मीन और समुद्री वातावरण को बचाने के हरसंभव प्रयास करेगी और साथ ही प्रभावित लोगों को आजीविका भी देगी.

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