संदीप पांडे ने सम्मान वापस किया

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Image caption संदीप पांडे ने उत्तर प्रदेश में बच्चों के लिए बहुत काम किया है.

जाने माने समाजसेवी और रैमन मैग्सेसे अवार्ड विजेता संदीप पांडे ने भारत सरकार का दिया हुआ रोज़गार जागरुकता अवार्ड वापस कर दिया है.

संदीप को यह अवार्ड लोगों में सरकार के मनरेगा परियोजना के बारे में जागरुकता पैदा करने के लिए दिया गया था जिसमें प्रशस्ति और 44 हज़ार रुपए दिए जाते हैं.

संदीप पांडे का कहना है कि उन्हें यह दुखद कदम उठाना पडा है क्योंकि ग्राम पंचायत के स्तर पर भ्रष्ट और आपराधिक छवि वाले लोगों को राजनीतिक प्रश्रय दिया जा रहा है.

मनरेगा के तहत हर ग्रामीण घर के एक सदस्य को वर्ष में सौ दिन रोज़गार मुहैया कराया जाता है.

उन्होंने विशेष तौर पर हरदोई ज़िले के ऐरा काके मउ का उल्लेख करते हुए कहा है कि गांव के ग्राम प्रधान के पति ने पंचायत के छह लाख 20 हज़ार रुपए ले लिए और जब इस बारे में लोगों ने शिकायत की तो पुलिस की मौजूदगी में लोगों को पीटा गया.

पांडे का कहना था कि इस मामले में दोषियों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की गई और वो इससे बेहद दुःखी हैं.

पांडे का कहना था, ‘‘हमने इस मामले कि शिकायत खंड विकास अधिकारी से लेकर केन्द्र सरकार में ग्रामीण विकास मंत्रालय तक की है लेकिन दो साल हो चुके है आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई.बल्कि उल्टा हुआ, जिनके ख़िलाफ़ शिकायत है उन्हें राज्य औऱ केन्द्र सरकार बचाने की कोशिश हो रही है. इसी से क्षुब्ध होकर हम लोगों ने ये पुरस्कार ठुकराने का फैसला किया है.’’

उन्होंने कहा, ‘‘भारत में सबसे बडे दुख की बात ये है कि कल्याणकारी योजनाओं में फैले भ्रष्टाचार से भारत की राजनीति चलती है. जो दल सत्ता में है या फिर जो दल सत्ता में आ सकते है वो कभी भी नहीं चाहेंगे कि इस तरह के भ्रष्टाचार के खिलाफ कोई कार्रवाई हो.’’

पांडे को सरकार की तरफ से सम्मान फरवरी 2009 में दिया गया था. इससे पहले गरीब बच्चों के लिए उनके कार्यों को देखते हुए 2002 में रैमन मैग्सेसे अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है.