बिहार में डॉक्टरों की हड़ताल ख़त्म

बिहार के सभी छह मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में जूनियर डॉक्टरों की पांच दिनों से जारी हड़ताल शुक्रवार दोपहर बाद समाप्त हो गई. इस हड़ताल के दौरान 40 से भी अधिक मरीज़ों की जाने गई.

गया के अस्पताल में गत रविवार रात विधायक सुरेन्द्र यादव की मौजूदगी में उनके अंगरक्षक और जूनियर डॉक्टरों के बीच हुई हिंसक झड़पें हुई थीं. इसके बाद राज्य के सभी जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर चले गएथे.

दोनों अंगरक्षकों को अगले ही दिन गिरफ्तार कर लिया गया था. इस मामले में गिरफ़्तारी से बचते आ रहे राष्ट्रीय जनता दल के विधायक सुरेन्द्र यादव ने शुक्रवार को गया के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया.

उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है.

हड़ताली डॉक्टरों का एक प्रतिनिधि मंडल शुक्रवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिला और अस्पताल परिसर में डॉक्टरों की सुरक्षा संबंधी क़ानूनी प्रावधान की गुहार लगाई.

मुख्यमंत्री से मिलकर लौटे जूनियर डॉक्टरों के एक प्रतिनिधि डॉ. धीरज ने बीबीसी को बताया, '' जूनियर डॉक्टरों पर गया में गोली चलवाने वाले विधायक को जेल भेजे जाने और अस्पतालों में चिकित्सकों की हिफ़ाजत संबंधी क़ानून बनाने का आश्वासन मुख्यमंत्री से मिलने के बाद हड़ताल ख़त्म की जा रही है.''

जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन की तरफ़ से राज्य के सभी बड़े सरकारी अस्पतालों में की गई इस हड़ताल के ख़िलाफ़ आम लोगों में भारी रोष देखा जा रहा था.

अब ये भी सवाल पूछा जाने लगा है कि जब मुख्यमंत्री के एक आश्वासन पर ही इस हड़ताल का टूटना तय था तो इतनी मौतें होने से पहले ही ये आश्वाशन क्यों नहीं दिया गया.

हड़ताली डॉक्टरों की मांग थी कि अस्पतालों में उनकी सुरक्षा की गारंटी संबंधी क़ानून बने और गया में जूनियर डॉक्टरों के साथ मारपीट के ज़िम्मेदार विधायक सुरेन्द्र यादव को गिरफ़्तार करके उनके ख़िलाफ़ सख्त कार्रवाई की जाए.

संबंधित समाचार