काले धन वाले 17 को नोटिस: प्रणब

भारत का रुपया

केंद्रीय वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि स्विस बैंकों में काला धन जमा करने के मामले में 17 लोगों को नोटिस दिया गया है.

हालांकि उन्होंने कहा है कि इन लोगों के नाम ज़ाहिर करना संभव नहीं है.

प्रणब मुखर्जी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अख़बारों में तहलका पत्रिका के हवाले से उन 15 लोगों के नाम प्रकाशित हो गए हैं जिन्होंने कथित तौर पर विदेशों में पैसा जमा कर रखा है.

अभी यह स्पष्ट नहीं है कि जिन लोगों को नोटिस भेजे गए हैं और जिनके नाम मीडिया में प्रकाशित हुए हैं वे एक ही हैं या अलग-अलग. क़ानूनी बाध्यता

प्रणब मुखर्जी ने कहा है, "हमें कुछ नामों की जानकारी मिली थी और उनमें से 17 लोगों को नोटिस भेजे जा चुके हैं और क़ानूनी कार्रवाई शुरु हो चुकी है."

वित्तमंत्री ने थोड़े दिन पहले कालेधन के मामले में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी यही कहा था कि सरकार कार्रवाई कर रही है लेकिन जिन पर कार्रवाई की जा रही है उनके नाम नहीं बताए जा सकते.

उन्होंने दोहराया है कि सरकार इन लोगों के नाम ज़ाहिर नहीं कर सकती क्योंकि इसका उपयोग सिर्फ़ टैक्स या कर से जुड़े मामलों में किया जा सकता है.

उन्होंने कहा, "सरकार अपनी ओर से इन नामों को ज़ाहिर नहीं कर सकती क्योंकि सरकारों से हुई संधियों के मुताबिक़ हम उन नामों का उपयोग सिर्फ़ कर संबंधी मामलों में कर सकते हैं." नाम प्रकाशित

इस बीच भारत सरकार को बैंक ऑफ़ लिख़टेंश्टाइन में काला धन जमा करने वाले जिन 18 भारतीयों या भारतीय कंपनियों के नाम सौंपे गए थे उनमें से 15 के नाम चर्चित पत्रिका तहलका ने प्रकाशित किए हैं.

जर्मनी के म्यूनिख शहर से 190 किलोमीटर दूर स्थित लिख़टेंश्टाइन में इन खातों के मौजूद होने की बात सामने आई थी.

तहलका पत्रिका के मुताबिक़ जिन 18 लोगों के नामों की सूची जर्मनी की सरकार ने भारत सरकार को सौंपी थी, उनमे से 15 लोगों के नामों को वे छाप रहे हैं और उनेक बारे में तहलका के पास पूरी जानकारी है.

तहलका का ये भी कहना है कि वो अभी इन 15 लोगों के सिर्फ़ नाम भर उजागर कर रही है और उनका पता, टेलिफ़ोन नंबर वगैरह और उनके व्यापार के बारे में वे अभी ज़िक्र नहीं कर रहे हैं.

कथित तौर पर काला धन बाहर के मुल्कों में जमा होने की बात पर भारतीय राजनीति में पिछले कई दिनों से ख़ासी बहस छिड़ी हुई है.

विपक्षी भारतीय जनता पार्टी और वामपंथी पार्टियों समेत कई विपक्षी दल इस बात पर लगातार बल देते रहे हैं कि इन नामों को जनता के समक्ष उजागर किया जाना चाहिए. आरोप

भाजपा ने तो सरकार पर ये आरोप तक लगाए हैं कि वो विदेशी बैंकों में जमा भारतीय काले धन को देश वापस लौटाना ही नहीं चाहती.

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