देवास और एंट्रिक्स का क़रार ख़त्म होगा

के राधाकृष्णन इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption के राधाकृष्णन ने कहा कि देवास और एंट्रिक्स के बीच समझौते को ख़त्म करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है.

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानि इसरो ने देवास मल्टीमीडिया के साथ हुए स्पेक्ट्रम समझौते को ख़त्म करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.

देवास मल्टीमीडिया और इसरो की वाणिज्यिक शाखा एंट्रिक्स के बीच दुर्लभ 'एस-बैंड स्पेक्ट्रम' के लिए हुए समझौते पर पिछले कुछ दिनों से मीडिया में कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं.

मीडिया में इसरो की शाखा एंट्रिक्स और देवास के बीच हुए समझौते से सरकार को दो लाख करोड़ के घाटे की ख़बरों के बीच मंगलवार को इसरो प्रमुख के राधाकृष्णन ने कहा कि देवास को अबतक ना तो स्पेक्ट्रम और ना ही उपग्रह मुहैया करवाए गए हैं.

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने दावा किया है कि वर्ष 2005 में एंट्रिक्स और देवास मल्टीमीडिया के बीच हुए क़रार से सरकार को कोई वित्तीय हानि नहीं हुई है.

ग़ौरतलब है कि देवास मल्टीमीडिया को इसरो के एक पूर्व अधिकारी ने शुरू किया था.

मंगलवार देर शाम हुई एक प्रेसवार्ता में इसरो के प्रमुख के राधाकृष्णन ने स्वीकार कि इस क़रार की जानकारी अंतरिक्ष आयोग या केंद्रीय कैबिनेट को नहीं दी गई थी.

कैबिनेट को जानकारी नहीं दी

एंट्रिक्स और देवास के बीच हुए समझौते में इसरो ने अपने दो उपग्रहों पर स्थित सभी ट्रांसपोंडरों के 90 प्रतिशत अधिकार देवास को देने का क़रार किया था.

के राधाकृष्णन ने पत्रकारों को बताया, "इस बात की साफ़ तौर पर जानकारी कैबिनेट को नहीं दी गई थी कि 'जीसैट-छह' और 'जीसैट-छह ए' उपग्रहों का अधिकतर इस्तेमाल एंट्रिक्स और देवास मल्टीमीडिया के बीच हुए वाणिज्यिक क़रार को पूरा करने के लिए किया जाएगा."

इसरो प्रमुख की इस प्रेसवार्ता से पहले प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर मीडिया में आ रही इस ख़बर का खंडन किया गया कि देवास को 70 मेगाहर्ट्ज़ स्पेक्ट्रम मात्र एक हज़ार करोड़ रुपए में दिया गया है.

प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से कहा गया कि अभी इस विषय पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है इसलिए दो लाख करोड़ के मुनाफ़े की हानि की बात निराधार है.

लेकिन भारत की प्रमुख विपक्षी पार्टी बीजेपी इस खंडन से संतुष्ट नहीं हुई.

पार्टी प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने सरकार पर आक्रामक रुख़ अपनाते हुए कहा,"ये ज़ाहिर हो गया है कि मनमोहन सिंह स्वतंत्रता के बाद सबसे भ्रष्ट सरकार चला रहे हैं. फिर भी ये दावा किया जाता है कि वे 'मिस्टर क्लीन' हैं." इसरो प्रमुख के राधाकृष्णन ने कहा कि देवास के साथ क़रार को ख़त्म करने की प्रक्रिया इस लिए शुरू की गई है क्योंकि एस-बैंड स्पेक्ट्रम की ज़रुरत राष्ट्रीय सामरिक उद्देश्यों के लिए है.

उन्होने कहा कि क़रार ख़त्म करने का फ़ैसला जुलाई 2010 में लिया गया था और इस समय ये प्रक्रिया जारी है.

संबंधित समाचार