बिनायक मामले में फ़ैसला सुरक्षित

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छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में मानवाधिकार कार्यकर्ता बिनायक सेन की ज़मानत की अर्जी पर सुनवाई पूरी हो गई है लेकिन अदालत ने अभी फ़ैसला सुरक्षित रखा है.

गुरुवार को फ़ैसला आने की उम्मीद है. न्यायमूर्ति टीपी शर्मा और न्यायमूर्ति आरएल झावर की खंडपीठ ने बिनायक सेन मामले की सुनवाई की.

बिनायक सेन को रायपुर की एक निचली अदालत ने एक व्यवसायी पीयूष गुहा और माओवादी नेता नारायण सान्याल के साथ देशद्रोह का दोषी ठहराते हुए उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई थी. सज़ा के निलंबन और ज़मानत के लिए बिनायक सेन और पीयूष गुहा की ओर से उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई थी जिस पर 24 और 25 जनवरी को सुनवाई हुई.

बहस

इस दौरान बिनायक सेन और पीयूष गुहा के वकीलों ने बहस की. बिनायक सेन की ओर से भारतीय जनता पार्टी के राज्य सभा सांसद राम जेठमलानी ने अपनी पार्टी के रुख़ के विरुद्ध जाकर पैरवी की.

इस बीच यूरोपीय संघ के पर्यवेक्षकों का एक प्रतिनिधि मंडल भी अदालत में मौजूद था. यूरोपीय संघ ने बिनायक सेन की ज़मानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान मौजूद रहने की इच्छा ज़ाहिर की थी और अदालत ने उन्हें इसकी अनुमति भी प्रदान कर दी है.

जनवरी 24 और 25 को मामले की सुनवाई के दौरान प्रतिनिधि मंडल अदालत में मौजूद था. इसमें मुख्य रूप से बेल्जियम, जर्मनी, स्वीडन, फ़्रांस, हंगरी और ब्रिटेन राजनयिक शामिल है लेकिन बुधवार को इस प्रतिनिधिमंडल के सिर्फ दो सदस्य ही अदालत पहुंचे.

यूरोपीय संघ की इस पहल की छत्तीसगढ़ में आलोचना हो रही है. बार काउन्सिल के सदस्य फ़ैज़ल रिज़वी ने यूरोपीय संघ के पर्यवेक्षकों की मौजूदगी पर आपत्ति जताई.

उनका कहना है कि इस तरह का क़दम भारतीय न्यायप्रणाली पर संदेह जताने के बराबर है. उनका कहना है कि पर्यवेक्षकों का विरोध होना चाहिए. भारतीय जनता पार्टी भी यूरोपीय पर्यवेक्षकों का विरोध कर रही है है.

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