पाटिल पर टिप्पणी: मंत्री का इस्तीफ़ा

अशोक गहलोत
Image caption अशोक गहलोत को दिल्ली आकर सफ़ाई देनी पड़ी है

भारत की राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के प्रति की गई टिप्पणियों को लेकर राजस्थान के वक्फ़ राज्यमंत्री अमीन ख़ान को अपना पद गँवाना पड़ा है.

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बुधवार को उनसे इस्तीफ़ा देने को कहा था बाद में राज्यमंत्री ने गुरुवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है.

समझा जाता है कि अमीन ख़ान की टिप्पणियों पर राष्ट्रपति भवन ने नाराज़गी प्रकट की और सरकार से पूरे मामले का विवरण माँगा था.

मुख्यमंत्री गहलोत ने राज्यमंत्री का इस्तीफ़ा राज भवन भेज दिया है.

अमीन ख़ान की टिप्पणियों ने इतना तूल पकड़ा कि मुख्यमंत्री गहलोत को अचानक बुधवार को दिल्ली जाकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल से मिलकर सफ़ाई देनी पड़ी.

गहलोत ने अमीन खान की टिप्पणियों को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए इसके लिए खेद जताया है.

'बिना मांगे पद'

राज्यमंत्री ख़ान ने ख़ुद को बेक़सूर बताया और कहा कि उनकी बात का ग़लत अर्थ निकल लिया गया.

उन्होंने मंगलवार को राज्य के पाली ज़िले में कांग्रेस कार्यकर्ताओं की सभा में कुछ ऐसा कहा कि देहात से लेकर दिल्ली तक राजनीति में उबाल आ गया.

वहाँ मौजूद लोगों का कहना है कि अमीन ख़ान ने पाली में कार्यकर्ताओं को प्रतिभा पाटिल की बानगी दी और कहा कि कांग्रेस में कार्यकर्ताओ का बड़ा सम्मान है.

उन्होंने कहा, "जब इंदिरा गाँधी सता से बाहर हो गईं तो प्रतिभाजी ने उनकी बड़ी सेवा की. उन्होंने इंदिरा जी की रसोई में खाना बनाया और बर्तन मांजने में मदद की. तब ये नहीं सोचा था प्रतिभा जी ने कि ऐसा पद मिल जाएगा. उन्हें बिना मांगे पद मिला."

सभा में मौजूद लोगों का कहना है कि अमीन ख़ान कार्यकर्ताओं से धैर्य पूर्वक कार्य करने का सबक दे रहे थे और कह रहे थे कि धैर्य रखने से फल मिल जाता है.

राजपूत करणी सभा ने मंत्री के इस कथन का भारी विरोध किया और कुछ स्थानों पर प्रदर्शन भी किए.

विपक्षी भाजपा ने भी मंत्री को बर्खास्त करने की मांग की थी.

ख़ान विधानसभा के एक वरिष्ठ सदस्य हैं. वे सीमावर्ती बाड़मेर ज़िले की शिव विधानसभा सीट से विधायक चुने गए थे.

मगर मंत्री पहली बार बनाए गये थे.

संबंधित समाचार