रिहा किए जाएंगे जवान: माओवादी

माओवादी (फाइल चित्र) इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption अपनी मांगे मनवाने के लिए माओवादी पहले भी जवानों को अगवा कर चुके हैं.

माओवादियों ने छत्तीसगढ़ राज्य में अगवा किए गए पुलिस के पाँच जवानों की रिहाई की घोषणा कर दी है.

शुक्रवार सुबह बीबीसी को दी गई जानकारी के मुताबिक सभी जवानों को बस्तर ज़िले के कोंडा ब्लॉक में करिमेटा गांव के पास एक आम सभा कर रिहा किया जाएगा.

यह इलाका पूरी तरह माओवादियों के नियंत्रण वाला है जहां माओवादियों की 'जनताना' सरकार का प्रभाव है. करिमेटा गांव जंगलों के बीच बसा है.

जवानों की रिहाई के लिए सरकार और माओवादियों के बीच मध्यस्थता करने छत्तीसगढ़ पहुंचे सामजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश और उनके साथ मौजूद पाँच सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को भी यह सूचना मिल चुका है. ये सभी इस इलाके के लिए रवाना हो चुके हैं.

जवानों की रिहाई तक पुलिस और माओवादियों ने 48 घंटे के युद्ध विराम की घोषणा भी की है.

मांग

माओवादियों की जनमुक्ति छापामार सेना ने 25 जनवरी को नारायणपुर ज़िले के माराबेडा के इलाक़े से इन सभी जवानों का अपहरण कर लिया था.

उस वक़्त वे वे यात्री बस में बैठ कर ज़िला मुख्यालय आ रहे थे.

बाद में माओवादियों ने बयान जारी कर कहा था कि सभी जवान सुरक्षित हैं और उन्हें युद्धबंदी का दर्जा प्राप्त है. उनकी रिहाई के एवज़ में माओवादियों ने कुछ शर्तें भी रखी थीं.

माओवादियों ने घोषणा की थी कि वे पुलिसकर्मियों को स्वामी अग्निवेश, गौतम नौलखा और मीडियाकर्मियों के सामने रिहा करेंगे. इस बीच माओवादियों की उत्तर क्षेत्रीय कमिटी के प्रवक्ता प्रभात ने पहले से रिकार्ड किए गए एक बयान में माओवादियों की शर्तों के बारे में बताते हुए कहा है कि 10 फ़रवरी से 12 फ़रवरी की मध्यरात्रि तक पुलिस और सुरक्षा बल के जवानों को थानों और बैरकों में वापस बुला लिया जाए.

प्रभात का कहना था कि इस दौरान जनमुक्ति छापामार सेना के लोग भी पुलिसवालों पर हमला नहीं करेंगे.

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