शौरी से सीबीआई करेगी पूछताछ

अरुण शौरी
Image caption अरुण शौरी दूरसंचार मंत्री रहे हैं

2-जी स्पैक्ट्रम आबंटन में घोटाले की जाँच कर रहा केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) पूर्व दूरसंचार मंत्री अरुण शौरी से 21 फरवरी को पूछताछ करेगा.

सीबीआई वर्ष 2001 से दूरसंचार नीतियों के आपराधिक पहलू की भी जाँच कर रही है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ सीबीआई ने पिछले हफ़्ते अरुण शौरी से संपर्क किया था. सीबीआई का कहना था कि वो सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत उनसे पूछताछ करना चाहती है.

पीटीआई ने अधिकारियों के हवाले से बताया कि सीबीआई ने अनाम व्यक्तियों के ख़िलाफ़ प्राथमिक जाँच दर्ज की है.

इसका मक़सद ये पता लगाना है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में उस समय के कैबिनेट ने लाइसेंस आबंटन में 'पहले आओ, पहले पाओ' का जो प्रावधान स्वीकृत किया था, उसका पालन किया गया या नहीं.

अध्ययन

अरुण शौरी ने पीटीआई को बताया कि किसी ने उन्हें फ़ोन किया था, जब वे घर पर नहीं थे. और बाद में उन्होंने सीबीआई को ये बताया है कि कोलकाता से लौटने के बाद वे 21 फरवरी को एजेंसी के सामने पेश होंगे.

माना जा रहा है कि सीबीआई कई पूर्व दूरसंचार मंत्रियों के समय में बुलाई गई बैठकों के बारे में विस्तृत अध्ययन करेगी. इनमें प्रमोद महाजन, अरुण शौरी और दयानिधि मारन के समय बुलाई गई बैठकें शामिल हैं.

सीबीआई के मुताबिक़ पहले आओ, पहले पाओ नीति के तहत क़रीब 50 लाइसेंस बाँटे गए. एजेंसी का कहना है कि इस नीति के कारण फ़ायदा उठाने वाली कंपनियों में भारती, वोडाफ़ोन और आइडिया भी शामिल हैं.

सीबीआई उन कंपनियों के दस्तावेज़ों का भी अध्ययन करना चाहती है, जिन्हें लाइसेंस दिए गए.

पिछले साल दिसंबर में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिया था कि वो वर्ष 2001 से 2007 के दौरान लाइसेंस आबंटित किए जाने की जाँच करे और रिपोर्ट दे.

इस अवधि में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) और कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) का कार्यकाल आता है.

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