'पहले गुजरात के मंत्री के ख़िलाफ़ क़दम वापस लीजिए'

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Image caption मनमोहन सिंह ने विपक्ष के रुख़ की आलोचना की

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने व्यापक आर्थिक सुधारों के बारे में टीवी संपादकों के सवालों के जवाब में इशारा किया कि कुछ विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्य इसलिए सुधारों का विरोध कर रहे हैं क्योंकि वे कुछ अन्य ही विषयों पर रियायत चाहते हैं.

मनमोहन सिंह का कहना था कि संसद को काम नहीं करने दिया जाता और प्रगतिशील गुड्स एंड सर्विसिज़ टेक्स की बात की जाए तो भाजपा की ओर से इसका विरोध होता है.

उन्होंने कहा, "मैं किसी का नाम नहीं लेना चाहता. गुजरात सरकार में एक मंत्री थे, उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई हुई है, हमसे कहा गया कि पहले आप ये क़दम वापस लीजिए.....मैं इस बारे में और कुछ नहीं कहना चाहता..."

जानकारों का कहना है कि प्रधानमंत्री का इशारा गुजरात के पूर्व गृह मंत्री अमित शाह की ओर था.

अमित शाह पर बहुचर्चित सोहराबुद्दीन एनकांउटर मामले में शामिल होने का आरोप है.

अमित शाह पर आरोप है कि वो उन दाग़ी पुलिस अधिकारियों के साथ संपर्क में थे जिन पर सोहराबुद्दीन को फ़र्जी मुठभेड़ में मारने का आरोप है और उनके ख़िलाफ़ सीबीआई जाँच कर रही है.

बाद में भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने मनमोहन सिंह के आरोप पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि भाजपा की जेपीसी की माँग पहले से ही हो रही है और इसका अमित शाह मामले से कोई संबंध नहीं है.

भाजपा पर तीखी टिप्पणी

मनमोहन सिंह ने कहा कि इसकी कोशिश हो रही है कि आने वाला सत्र ठीक से चले. विपक्ष के साथ बातचीत चल रही है. हम ये सुनिश्चित करना चाहते हैं कि हमारे मतभेद जो भी हों, संसद की कार्यवाही नहीं रुकनी चाहिए.

मनमोहन सिंह ने कहा कि संसद को जिन वजहों से रोका जा रहा है, वो समझ में नहीं आ रहा है. घरेलू स्तर पर हमारे कई मतभेद हो सकते हैं लेकिन हमें कोशिश करनी चाहिए कि हमारी ग़लत छवि बाहर न जाए.

उनका कहना था, "भारतीय लोकतंत्र के प्रति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफ़ी सम्मान है. जब कभी भी मैं बाहर जाता हूँ, लोग भारतीय लोकतंत्र और यहाँ मानवाधिकार के प्रति हमारे रुख़ की सराहना करते हैं."

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