बाबरी मामले में सुप्रीम कोर्ट में अपील

लाल कृष्ण आडवाणी

आडवाणी बाबरी मस्जिद विध्वंस को अपने जीवन की सबसे दुखद घड़ी का नाम देते रहे हैं.

केंद्रीय जाँच ब्यूरो यानि सीबीआई ने शुक्रवार को बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फ़ैसले को चुनौती दी है जिसमें भारतीय जनता पार्टी नेता लाल कृष्ण आडवाणी समेत 20 लोगों के ख़िलाफ़ आपराधिक षड्यंत्र के मुक़दमे को रद्द कर दिया गया था.

सुप्रीम कोर्ट में दायर अर्ज़ी में सीबीआई ने कहा है कि इन लोगों के ख़िलाफ़ साज़िश का मुक़दमा फिर से क़ायम किया जाए.

जाँच एजेंसी का कहना है कि इस मामले में उच्च न्यायालय सही नतीजे पर नहीं पहुँच पाई थी.

उच्च न्यायालय ने मई 2010 में सीबीआई की उस अर्ज़ी को ख़ारिज कर दिया था जिसमें बीजेपी और संघ परिवार के शीर्ष नेताओ के ख़िलाफ़ साज़िश के केस को फिर से क़ायम करने की अपील की गई थी.

न्यायधीश आलोक कुमार सिंह का कहना था कि विशेष अदालत के फ़ैसले को चैलेंज करने वाली सीबीआई की अर्ज़ी में कोई दम नहीं है.

बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में दो मुक़दमे चल रहे हैं - एक तो संघ परिवार के नेताओं के ख़िलाफ़ जो मस्जिद ढहाए जाने के वक़्त राम कथा कुंज के पास बने मंच पर मौजूद थे.

दूसरा मामला अज्ञात कारसेवकों के ख़िलाफ़ है.

राजनीति से प्रेरित

जिन नेताओं के ख़िलाफ़ साज़िश का मुक़दमा दर्ज किया गया था उनमें आडवाणी के अलावा बीजेपी नेता मुरली मनोहर जोशी, मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्य मंत्री उमा भारती, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य मंत्री कल्याण सिंह, विश्व हिंदू परिषद नेता अशोक सिंघल, गिरिराज किशोर, विनय कटियार, विष्णु हरि डालमिया, साध्वी रितंभरा और महंत अवैद्य नाथ के नाम शामिल है.

भाजपा ने सीबीआई की अपील को राजनीति से प्रेरित बताया है.

पार्टी प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर ने बीबीसी से कहा कि अर्ज़ी दाख़िल किए जाने की घड़ी साफ़ कर देती है कि इसके पीछे कौन सी भावना काम कर रही है. अगर सीबीआई इस मामले में इतनी ही संजीदा थी तो ये अर्ज़ी पहले क्यो नहीं दाख़िल की गई?

जावडेकर का तर्क है कि सरकार भाजपा पर दबाव बनाने के लिए ये सब करवा रही है.

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.