पाँच रुपए में भरपेट भोजन

पाँच रुपये में दाल भात
Image caption छत्तीसगढ़ में कई केंद्र पाँच रुपए में दाल भात उपलब्ध कराते हैं

आज के महंगाई के इस दौर में अगर कोई कहे कि आप को पांच रुपए में भरपेट खाना मिलेगा तो आप शायद अपने कानों पर विश्वास न करें.

पर छत्तीसगढ़ में कई ऐसे केंद्र है जहाँ आप पांच रुपए में भरपेट दाल चावल खा सकते है.

सरकार ने अन्नपूर्णा दाल भात योजना 2004 में शुरु की थी. इसके तहत राज्य में क़रीब डेढ़ सौ दाल भात केंद्र चलाए जा रहे हैं.

इन्हें स्वयंसेवी संगठन, पंचायत और सहकारिता आधारित संस्थाएं चला रही है. इन संस्थाओं को राज्य सरकार सस्ते में चावल उपलब्ध कराती है और रसोई की ज़रुरी सामग्री भी देती है.

राजधानी रायपुर के जेल परिसर में ऐसा ही एक केंद्र चल रहा है जहां खाना खाने कई लोग पहुंचते हैं. इन में से एक श्रीराम सहारे कहते हैं, ''खाने में दाल भात सब्ज़ी और नींबू का अचार था. स्वाद घर के खाने की तरह ही था और इतना था कि पेट भर जाए.''

कुछ लोग तो दो वर्षों से यहां खाने आते हैं और इनका कहना है कि खाना अच्छा है और वे कभी इसे खा कर बीमार नहीं हुए है.

समाजसेवा

पर पाँच रुपए में भरपेट खाना मिलना जितनी अनहोनी बात है शायद उससे भी ज़्यादा ये कि इतनी कम लागत में लोगों को ये खाना कैसे उपलब्ध कराया जा रहा है.

इस केंद्र को चलाने वाले मोहन चोपड़ा कहते हैं कि वो इसे व्यक्तिगत रुप से चलाते है. राशन बाज़ार भाव पर खरीदते हैं. वो कहते हैं, ''सरकार से हमें सवा छह रुपए किलो चावल मिलता है पर बाकी सामान सस्ता नहीं मिलता.''

Image caption दाल भात केंद्र के कुछ नियम भी हैं

उनके दाल भात केंद्र में आठ लोग काम करते हैं और यहाँ खाना खाने आने वाले लोगो को भी कुछ सख्त हिदायतें दी गईं हैं जैसे नकद पैसा दें और झूठा न छोड़े यानि कुछ भी बरबाद न करें.

मोहन चोपड़ा के इस केंद्र में रोज़ क़रीब 600 लोग खाना खाने आते हैं. पर उनका कहना है कि समाज सेवा के लिए तो ये ठीक है या फिर बस रोज़ी निकाल लेने के लिए पर ये कमाई का ज़रिया नहीं हो सकता.

वो कहते हैं, ''मुझे ये ज़मीन मुफ्त मिली है तो मैं इसे चला रहा हूँ, नहीं तो ये चलाना संभव नहीं है. सरकार को इस योजना को कारगर बनाने के लिए और क़दम उठाने चाहिए.''

इस योजना को सार्थक बनाने के लिए शायद सरकार को इस पर और ध्यान देने की ज़रुरत है.

और अगर धन के संचार से योजना बेहतर हो सकती तो शायद सरकार को व्यापारियों आदि को इसमें शामिल करना चाहिए ताकि कम क़ीमत में आम आदमी अपना पेट भर सके.

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