डीएम को रिहा कराने की कोशिशें तेज़

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Image caption डीएम के अपहरण पर उड़ीसा विधानसभा में भी हंगामा हुआ.

उड़ीसा के मलकानगिरी ज़िले से अगवा किए गए ज़िलाधिकारी आरवी कृष्णा और जूनियर इंजीनियर पबित्र माझी को छुड़ाने की कोशिशें तेज़ कर दी गई हैं.

माओवादियों की ओर से चुने गए मध्यस्थ प्रोफेसर हरगोपाल और प्रोफेसर सोमेश्वर सरकार के साथ बातचीत करेंगे और बंधकों को छुड़ाने की कोशिश करेंगे.

राज्य के मुख्य सचिव बीके पटनायक के अनुसार अगवा किए गए दोनों अधिकारी माओवादियों की कैद में सुरक्षित हैं.

कृष्णा और माझी को बुधवार शाम मलकानगिरी से अग़वा किया गया था. माओवादी ने इन्हें छोड़ने के बदले अपनी मांगे सामने रखी थीं और इसके लिए 48 घंटे की समयसीमा दी थी. मध्यस्थों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की अपील के चलते माओवादियों ने इस समयसीमा को बढ़ा दिया है

अभियान पर रोक

सरकार की ओर से भी राज्य में माओवादियों के खिलाफ़ जारी अभियान को रोक दिया गया है.

गुरुवार को माओवादियों ने राज्य की नवीन पटनायक सरकार के सामने अपनी सात मांगे रखीं. माओवादियों के अनुसार दोनों बंधकों को तभी छोड़ा जाएगा जब मलकानगिरी से केंद्रीय सुरक्षा बल को हटाया जाए, ऑपरेशन ‘ग्रीन हंट’ को खत्म किया जाए और कैद किए गए माओवादियों को छोड़ा जाए

माओवादियों की ओर से मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को लिखे चार पन्नों के पत्र में उड़ीसा सरकार को दमनकारी कहा गया है.

इस बीच आदिवासी बहुल मलकानगिरी ज़िले का संपर्क राज्य के दूसरे हिस्सों से कट गया है. खबरों के अनुसार माओवादियों ने कई सड़क-मार्गों पर लैंडमाइन बिछा दी हैं.

कृष्णा और माझी को रिहा करने को लेकर कई जगह प्रदर्शन हुए हैं और कई समाजिक कार्यकर्ताओं ने इनकी रिहाई की अपील की है.

गुरुवार को राज्य विधानसभा में इस मामले को लेकर विपक्षी दल के सदस्यों ने जमकर हंगामा किया था.

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