अदालत ने कहा गोधरा कांड एक साज़िश

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अहमदाबाद की एक विशेष अदालत ने गोधरा रेल कांड को साज़िश करार दिया है और मामले के अभियुक्तों में से 31 को दोषी पाया है.

वहीं अदालत ने 63 अभियुक्तों को बरी करने का आदेश दिया है.

इस मामले के मुख्य अभियुक्त हुसैन उमर को भी अदालत ने बरी कर दिया है.

अदालत का ये फ़ैसला 27 फ़रवरी 2002 को साबरमती एक्सप्रेस के एक डब्बे में लगाई गई आग के लिए गिरफ़्तार अभियुक्तों की भूमिका पर है.

उस आग में 59 लोग, जिनमें ज़्यादातर अयोध्या से लौट रहे हिंदू कारसेवक थे, मारे गए थे.

सज़ा की घोषणा

जिन्हें दोषी पाया गया है उन्हें क्या सज़ा होगी अदालत इसका ऐलान शुक्रवार 25 फ़रवरी को करेगी.

भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि अदालत का फ़ैसला ये दिखाता है कि जो हम कह रहे थे वो सही थी.

भाजपा कहती रही है कि साबरमती एक्सप्रेस में आग एक पूर्व नियोजित साज़िश के तहत लगाई गई थी.

गुजरात सरकार के प्रवक्ता जय नारायण व्यास ने कहा है कि अदालत के फ़ैसले से स्पष्ट हो गया है कि कुछ तथाकथित एनजीओ जो सरकार के चेहरे पर कालिख पोतने की कोशिश कर रहे थे वो ग़लत था.

फ़ैसले की गंभीरता को देखते हुए गुजरात में सुरक्षा व्यवस्था काफ़ी कड़ी रखी गई है.

इस मुकदमे की सुनवाई अहमदाबाद के सेंट्रल जेल में हुई है और फ़ैसला भी वहीं सुनाया गया.

गोधरा कांड

अभियोजन पक्ष के अनुसार साबरमती एक्स्प्रेस के एस-6 डब्बे पर लगभग 1,000 लोगों की भीड़ ने हमला किया था. घटना में 59 लोगों की मौत के बाद गुजरात में भारी सांप्रदायिक दंगे हुए थे.

इस मामले की तहकीकात के लिए नियुक्त पहली विशेष जांच समिति ने कहा था कि एक मौलवी ने अपने चार समर्थकों को आदेश दिया था इस डब्बे में आग लगाने के लिए.

राज्य के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसे पूर्व-नियोजित घटना का नाम दिया था.

इस जांच पर सवाल उठने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 2008 में आर के राघवन के नेतृत्व में एक और जांच दल गठित करने का आदेश दिया. इस दल की रिपोर्ट भी पहले से मेल खा रही थी.

इस मामले की सुनवाई जून 2009 में शुरू हुई. इसके अभियुक्तों में से 80 जेल में हैं और 14 ज़मानत पर बाहर हैं. इन सबके ख़िलाफ़ आपराधिक षडयंत्र और हत्या का मामला दर्ज है.

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