तेलंगाना बंद का व्यापक असर

तेलंगाना के समर्थन में बंद (फ़ाइल) इमेज कॉपीरइट AFP

तेलंगाना राज्य की मांग के पक्ष में 48 घंटों के बंद के पहले दिन तेलंगाना क्षेत्र में जीवन बुरी तरह से स्थगित होकर रह गया. इस बंद का आहवान 'तेलंगाना कार्यसमिति' किया है.

अलग तेलंगाना की मांग करने वाले केंद्र सरकार तुरंत तेलंगाना राज्य की स्थापना के लिए एक बिल संसद में पेश करने को कह रहे हैं.

इस बंद को लगभग सभी राजनीतिक दलों और जन संगठनों का समर्थन प्राप्त है.

तेलंगाना राष्ट्र समिति के अलावा भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी, तेलुगू देसम और भारतीय जनता पार्टी ने बंद का समर्थन किया है.

इस बंद में तेलंगाना क्षेत्र के लगभग सभी सरकारी कर्मचारी, डॉक्टर, वकील और छात्र शामिल हैं.

राज्य परिवहन निगम के सभी कर्मचारियों के इस हड़ताल में शामिल होने के कारण सार्वजनिक यातायात व्यवस्था ठप हो गई है और कोई बस किसी डिपो से बाहर नहीं आ सकी है.

इस बंद की सफलता को इस बात संकेत माना जा रहा है कि तेलंगाना क्षेत्र के सभी वर्गों ने अपने इस आंदोलन को एक निर्णायक चरण में पहुंचा दिया है और वो अलग तेलंगाना राज्य की स्थापना से कम कोई चीज़ स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं.

बंद का असर

हैदराबाद में तेलंगाना आंदोलन के सबसे बड़े केंद्र उस्मानिया विश्वविद्यालय कैंपस में लगातार दूसरे दिन भी पुलिस औऱ छात्रों के बीच झड़पें होती रहीं.

मंगलवार को पथराव, लाठीचार्ज और आंसू गैस की फ़ायरिंग से कई छात्र घायल हुए हैं.

Image caption उस्मानिया विश्वविद्यालय में पुलिस और छात्रों के बीच झड़पें हुई हैं.

शहर में कई स्थानों पर बड़े प्रदर्शन भी हुए हैं.

मंगलवार को ही राज्य विधानसभा में भी तेलंगाना की गूंज सुनाई दी और टीआरएस और टीडीपी के सदस्यों ने 'जय तेलंगाना' के नारे लगाते हुए सदन की कार्यवाही रोक दी.

राज्य के इतिहास में पहली बार विधानसभा में किसी बहस के बिना ही राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित करना पड़ा.

इधर दिल्ली में लोकसभा में भी तेलंगाना राष्ट्र समिति ने बिल लाने की मांग करते हुए एक स्थगन प्रस्ताव रखा.

टीआरएस के अध्यक्ष चंद्रशेखर राव ने कहा कि श्रीकृष्णा समिति की रिपोर्ट को आए लगभग दो महीने हो चुके हैं और अब तेलंगाना वाले अलग राज्य के लिए बिल से कम किसी चीज़ को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं.

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