उड़ीसा में अग़वा ज़िलाधिकारी रिहा

आर. वी. कृष्णा
Image caption ज़िलाधिकारी को आठ दिन बाद रिहा किया गया है.

उड़ीसा में मलकानगिरि के ज़िलाधिकारी आर विनील कृष्ण को माओवादियों ने रिहा कर दिया है. आर. विनील कृष्ण और जूनियर इंजीनियर पवित्र माझी को माओवादियों ने 16 फ़रवरी को मलकानगिरि के चित्रकोंडा इलाक़े से अग़वा कर लिया था.

इन दोनों को छोड़ने के लिए माओवादियों द्वारा नियुक्त मध्यस्थों और उड़ीसा सरकार के बीच बातचीत हुई थी उसके बाद इंजीनियर पबित्र माझी को रिहा कर दिया गया था.

लेकिन ज़िलाधिकारी को छोड़ने के लिए माओवादियों ने नई शर्त रखी थी. ये शर्त थी कि जिन पाँच माओवादी नेताओं को सरकार जेल से छोड़ने पर राज़ी हुई है उन्हें ज़िलाधिकारी की रिहाई से पहले माओवादियों को हाथों-हाथ सौंप दिया जाए.

ये शर्त माओवादियों ने पबित्र माझी के हाथों एक पत्र में भिजवाई थी. तेलुगू में लिखी इस चिट्ठी में ये भी माँग की गई थी कि स्वामी अग्निवेश को नए सिरे से बातचीत में शामिल किया जाए.

लेकिन अब लगता है कि माओवादी इस शर्त से पीछे हट गए हैं क्योंकि जिन माओवादियों की रिहाई की मांग की जा रही थी उन्हें अभी तक ज़मानत नहीं मिली है.

अदालत

जिन पाँच माओवादी नेताओं को सौंपे जाने की माँग की गई है उनमें गांती प्रसादम (फ़िलहाल भुवनेश्वर जेल में) और पदमा का नाम शामिल है. पदमा कॉमरेड रामकृष्णा की पत्नी है जो बड़े माओवादी नेता हैं.

इससे पहले बुधवार को प्रसादम को उड़ीसा हाई कोर्ट ने ज़मानत दे दी. लेकिन बाकी चारों माओवादी नेताओं की ज़मानत की याचिका अभी हाई कोर्ट में दाखिल की जानी है.

छठे माओवादी नेता श्रीरमालू श्रीनिवास को मलकानगिरी में एक अदालत ने ज़मानत दे दी थी लेकिन उन्हें अभी जेल से छोड़ा नहीं गया है क्योंकि उनके ख़िलाफ़ एक नया मामला दायर किया गया है. ये बात भी शायद माओवादियों को रास नहीं आई.

बुधवार को माओवादियों की नई शर्तों वाली चिट्ठी मिलने के बाद सरकारी अधिकारी और मध्यस्थ काफ़ी करीब सात घंटे तक बातचीत की थी. इस दौरान माओवादी नेता गांती प्रसादम और हैदराबाद से काम करने वाले वी राव से भी फ़ोन पर बात की गई.

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