उद्योग जगत:कहीं ख़ुशी, कहीं निराशा

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केंद्रीय रेल मंत्री ममता बनर्जी के 2011-12 के बजट का उद्योग जगत के संगठनों फ़िक्की और सीआई ने स्वागत किया है लेकिन एसोचेम ने सुरक्षा, साफ़-सफ़ाई के साथ-साथ विकास और निर्माण के लिए संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर ज़ोर दिया है.

भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने कहा है कि ये आम आदमी का रेल बजट हैं जिसमें तकनीकी विकास, सुरक्षा, यात्रियों की सुविधा का ध्यान रखा गया है.

सीआईआई का मानना है कि निजी-सार्वजनिक क्षेत्र के सहयोग से नई योजनाओं के लिए राशि उपलब्ध हो जाएगी. इस संगठन का ये भी मानना है कि नई कोच फ़ैक्टरियाँ, 700 मेगावॉट का गैस पर आधारित कारखाना, रेल पार्क, मशीन यूनिट लगाने सेदोनों क्षेत्रों के बीच सहयोग के नए अवसर पैदा होंगे.

लेकिन उद्योग संघ एसोचेम का कहना है कि रेल बजट से ये स्पष्ट नहीं होता है कि नेटवर्क बढ़ाने, नई कोच फ़ैक्टरियाँ और इंजन कारखाने बनाने के लिए धन कहाँ से आएगा.

'उद्योग जगत के लिए कुछ ख़ास नहीं'

एसोचेम के अनुसार कल्याणकारी योजनाओं पर अधिक ध्यान दिया गया है जिनके तहत समाज के कई वर्गों को फ़ायदा होगा लेकिन कार्यकुशलता बढ़ाने की बात नहीं की गई है.

एसेचेम के अध्यक्ष दिलीप मोदी के अनुसार, "यदि रेल बजट का सार लिया जाए तो उसमें उद्योग जगत के लिए कुछ ख़ास नहीं है क्योंकि वह जनता और कर्मचारियों के लिए कल्याणकारी योजनाओं पर केंद्रित है."

उद्योग संगठन फ़िक्की का मानना है कि रेल बजट से निजी-सार्वजनिक क्षेत्र के सहयोग को बढ़ावा मिलेगा जिससे रेलवे के संसाधनों को महत्वपूर्ण क्षेत्रों में इस्तेमाल किया जा सकेगा.

फ़िक्की ने माना कि पहली बार रेल बजट का ध्यान जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर राज्यों के विकास की ओर गया है जिससे इन क्षेत्रों के विकास को बढ़ावा मिलेगा.

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