'सरकार सदन में जवाब दे'

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Image caption सुप्रीम कोर्ट ने सीवीसी की नियुक्ति को अवैध ठहराया है.

सुप्रीम कोर्ट द्वारा मुख्य सतर्कता आयुक्त पीजे थॉमस की नियुक्ति को अवैध ठहराए जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने कहा है कि कोर्ट का ये फ़ैसला सरकार के लिए बड़ा तमाचा है.

इस मामले की गूँज लोक सभा और राज्य सभा दोनों में सुनाई दी. राज्य सभा में विपक्ष ने नेता अरुण जेटली ने सरकार से इस मामले पर बयान देने की माँग की और पूछा कि क्या सरकार इस बात के लिए ज़िम्मेदारी तय करेगी कि ये क्यों और कैसे हुआ.

वहीं भाजपा नेता राजीव प्रताप रुडी ने कहा, "ये सरकार के लिए सबसे बड़ा तमाचा है कि उच्चतम न्यायालय ने भारत सरकार की उस नियुक्ति को जिसे स्वयं प्रधानमंत्री ने किया था, भ्रष्टाचार के आरोप में अवैध क़रार दिया है. "

अदालत के फ़ैसले को ऐतिहासिक बताते हुए रुडी ने कहा कि विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने थॉमस की नियुक्ति पर जो आपत्ति उठाई थी, वो आपत्ति अदालती फ़ैसले के बाद जायज़ साबित हुई है.

वहीं इस पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का सम्मान करते हैं

उधर याचिकाकर्ता प्रशांत भूषण का कहना है कि ये एक अहम फ़ैसला है क्योंकि अदालत ने कहा है कि भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए स्वंतत्र, मज़बूत और सक्षम संस्थाओं की ज़रुरत है.

प्रशांत भूषण ने कहा, "ये फ़ैसला भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ लड़ाई में बहुत अहम है. इस फ़ैसले में अदालत ने बार-बार दोहराया है कि भ्रष्टाचार निरोधक संस्थाओं को बेधड़क और बिना किसी के प्रभाव में आए काम करने की ज़रुरत है. मैं उम्मीद करता हूं कि सरकार इस फ़ैसले के मद्देनज़र एक ऐसा ठोस लोकपाल बिल बनाएगी जिससे कि एक स्वंतत्र लोकपाल का गठन संभव हो सके."

'जवाबदेही तय हो'

भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी के नेता सीतराम येचुरी ने फ़ैसले के बाद कहा, "सीवीसी के इस्तीफ़ा देने के बाद भी ये मामला सुलझेगा नहीं. सरकार को सदन में ये बताना होगा कि पीजे थॉमस की सीवीसी के पद पर नियुक्ति कैसे हुई."

येचुरी ने कहा, " जिस दिन सीवीसी की नियुक्ति हुई उसी दिन हमने कहा था कि ये ग़लत नियुक्ति है. आज जो कुछ अदालत ने कहा है कि वो हमारी समझ को सही ठहराती है."

राज्य सभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने कहा, "ये सरकार के ख़िलाफ़ गंभीर टिप्पणी है. क्या सरकार इस बात की जवाबदेही तय करेगी कि ये नियुक्ति कैसे और क्यों हुई? हम चाहते हैं कि सरकार सदन में इस मुद्दे पर वक्तव्य दे."

उधर केंद्रीय क़ानून मंत्री वीरप्पा मोइली ने कहा कि वो अदालत के फ़ैसले का सम्मान करते हैं. लेकिन मोइली ने ये भी कहा कि मोइली ने कहा कि प्रधानमंत्री ने इस मामले में कोई ग़ैर-क़ानूनी काम नहीं किया है.

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