कांग्रेस नेता अर्जुन सिंह का निधन

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह का दिल्ली में निधन हो गया है. 81 वर्षीय अर्जुन सिंह पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे और दिल्ली के एम्स में भर्ती थे.

उनका अंतिम संस्‍कार रविवार को उनके गृह जनपद सीधी के चुरहट गांव में किया जाएगा. मध्‍य प्रदेश सरकार ने उनके सम्‍मान में शनिवार को अवकाश घोषित किया है. राज्‍य में तीन दिन के राजकीय शोक का ऐलान भी किया गया है.

पिछली यूपीए सरकार में 2004 से लेकर 2009 तक वे केंद्र सरकार में मानव संसाधन विकास मंत्री थे. उन्हें नेहरू-गांधी परिवार का वफ़ादार माना जाता था.

अर्जुन सिंह कई बार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे. एक ओर जहाँ पंजाब में शांति समझौता करवाने में उनके योगदान को सराहा जाता है वहीं भोपाल गैस कांड के बाद उनकी भूमिका को लेकर विवाद भी रहा है.

मानव संसाधन विकास मंत्री रहते पिछड़ों को आरक्षण दिलाने में भी अर्जुन सिंह का हाथ रहा है.कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत कई नेताओं ने उनकी मौत पर शोक व्यक्त किया है.

अर्जुन सिंह ने राजनीति का सफ़र मध्यप्रदेश से शुरु किया. 50 के दशक में विधानसभा के लिए चुने गए और फिर कई बार मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री रहे.

1980 में उन्हें मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री चुना गया. इसी दौरान भोपाल गैस त्रासदी हुई जिसे लेकर उनकी भूमिका विवादों के घेरे में रही है.

पिछले साल भोपाल गैस कांड मामले में एक बार फिर अर्जुन सिंह सवालों के घेरे में थे. विपक्षी पार्टियों का कहना था कि गैस कांड के बाद वॉरन एंडरसन के भारत से जाने से जुड़ी तमाम घटनाओं पर वे स्पष्टीकरण दें.

1985 में कुछ महीनों के लिए उन्हें मध्यप्रदेश की राजनीति से दूर पंजाब बतौर गर्वनर भेज दिया गया. ये वो दौर था जब पंजाब में चरमपंथ ज़ोरों पर था.

अर्जुन सिंह के गवर्नर रहते ही राजीव गांधी-संत लौंगोवाल समझौता हुआ.

इसके बाद वे फिर से मध्यप्रदेश की राजनीति में सक्रिय हुए. नरसिम्हा राव की कांग्रेस सरकार में अर्जुन सिंह केंद्रीय मंत्री बने.

बाबरी मस्जिद गिराए जाने के बाद उन्होंने नारायण दत्त तिवारी के साथ मिलकर अलग पार्टी भी बनाई लेकिन कुछ सालों बाद कांग्रेस में लौट आए.

शुक्रवार को ही कांग्रेस वर्किंग समिति के सदस्यों की घोषणा हुई थी जिसमें उनका नाम नहीं था, उन्हें स्थाई निमंत्रण दिया गया था.

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