सीवीसी मामले में ज़िम्मेदारी मेरी: प्रधानमंत्री

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प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि वो केंद्रीय सतर्कता आयुक्त की नियुक्ति के मामले में अपनी ज़िम्मेदारी को स्वीकार करते हैं.

जम्मू में पत्रकारों से बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वो अदालत के फ़ैसले का सम्मान करते हैं.सर्वोच्च अदालत ने गुरुवार को केंद्रीय सतर्कता आयुक्त की नियुक्ति फ़ैसले को अवैध ठहराया था.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि जिस उच्चस्तरीय समिति ने पीजे थॉमस की नियुक्ति की सिफ़ारिश की थी उसका क़ानून के मुताबिक कोई अस्तित्व नहीं है.

ग़ौरतलब है कि ये नियुक्ति जिस समिति ने की थी उसमें प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और लोकसभा में विपक्ष की नेता शमिल थीं.

विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने थॉमस के नाम पर आपत्ति जताई थी और इस नियुक्ति के लिए अपनी सहमति नहीं दी थी.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ये भी स्पष्ट किया कि इस मामले में गठबंधन के साझेदारों की ओर से किसी तरह का दबाव नहीं था.

उन्होंने पत्रकार सम्मेलन में इस मामले पर और कोई प्रश्न स्वीकार करने से इंकार करते हुए कहा कि पहले उन्हें इस मामले पर संसद में बयान देना है.

'शांति में सभी पक्षों की भलाई'

प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि कश्मीर में अमन-चैन का माहौल लौटेगा और वहां शांति बनाए रखने में सभी पक्षों की भलाई है.

उनका कहना था कि यदि हालत बेहतर होते हैं तो वो सेना के विशेषाधिकार क़ानून को हटाने को तैयार हैं.

इसके पहले प्रधानमंत्री ने कश्मीर से भाग कर आए शरणार्थियों के लिए 835 करोड़ रूपए की लागत से बनने वाले 4,213 फ़्लैंटों का उद्घाटन किया. इस कार्यक्रम के पहले दौर में 800 फ़्लैट बन चुके हैं और उनकी चाभी शरणार्थियों को सौंप दी गई. शरणार्थी फ़िलहाल तंबूओं में रह रहे हैं.

प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने काफ़ी कठिनाईयों के बाद पाकिस्तान के साथ बातचीत शुरू करने का फ़ैसला किया है.

उन्होंने कहा, “हम खुले मन से बातचीत के लिए जाएंगे. हम चाहते हैं सभी बकाया मुद्दों पर दोस्ताना माहौल में बात हो. इसमें कश्मीर का मामला भी शामिल है.”

लेकिन साथ ही प्रधानमंत्री का कहना था कि भारत मुंबई को नहीं भूल सकता और उन्होंने पाकिस्तान से आग्रह किया कि मुंबई हमलावरों के ख़िलाफ़ पूरी क़ानूनी कार्रवाई हो.

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