अब भी डायन मानी जाती हैं महिलाएं

Image caption सोनभद्र के इस इलाके में पहले भी इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं.

महिला दिवस का मौक़ा हो या महिला सशक्तीकरण का कोई उत्सव.

भारत में महिलाओं पर अत्याचार और उनके ख़िलाफ़ घिनौने अपराधों को लेकर अक्सर आवाज़ उठाई जाती है. लेकिन इन्हें पूरी तरह ख़त्म करने में शायद दशकों लगें.

उत्तरप्रदेश के सोनभद्र ज़िले में महिलाओं को डायन कहकर शारीरिक यातानाएं दिए जाने का एक मामला फिर सामने आया है.

हैरत ये है कि प्रशासन इन महिलाओं के आरोपों को सामान्य क़रार दे रहा है और मामले को रफ़ा-दफ़ा करने में जुटा है.

उत्तरप्रदेश के सोनभद्र ज़िले के जामपानी गांव में सात मार्च को दो महिलाओं को 'डायन' कहकर उनकी लाठी-डंडों से पिटाई की गई.

'लोग तमाशा देखते रहे'

पहवा और जासो देवी नामक इन महिलाओं का कहना है कि उन्हें डायन और भूत कहते हुए गांव के एक व्यक्ति और उसकी पत्नी ने न सिर्फ मारा बल्कि उनके ‘ज़ख्मों पर मिर्च भी लगाई’.

जासो देवी ने बीबीसी को बताया, "हम अपने घर की ओर लौट रहे थे कि रास्ते में हमें पकड़ लिया और एक कमरे में ले गए. वहां हमें बहुत मारा, यहां तक कि हमारे हाथ-पैर नीले हो गए और हमारे ज़ख्मों पर मिर्च लगाई. फिर हमें कमरे में बंद कर दिया."

अपनी आपबीती सुनाते हुए पहवा देवी ने कहा, "जब वो हमें मार रहे थे तब हमें बचाने के लिए कोई नहीं आया. लोग खड़े होकर तमाशा देख रहे थे लेकिन बचाने के लिए कोई आगे नहीं आया."

इस इलाक़े में महिलाओं के अधिकारों को लेकर काम करने वाली संस्था वनवासी सेवा आश्रम से जुड़ी शोभा देवी ने बीबीसी को बताया, "यहां एक शिवगुरु चर्चा चलती है जिसमें लोग पूछते हैं कि किसी बीमारी की वजह क्या है".

"उसमें एक युगल को बताया गया कि उनके घर के दक्षिण में जो रहता है उसने उनके बच्चे पर जादू-टोना कर दिया है. इसके बाद वो इन महिलाओं को पकड़ कर ले गए और उन्हें मारा."

'जादू-टोना कर दिया है'

इस मामले की सूचना पाकर मौक़े पर पहुंचे एक स्थानीय वकील सूर्यमणि यादव ने बताया, "मैंने देखा कि कुछ लोगों ने इन औरतों को घेरकर बंधक बना रखा है. उन्हें काफ़ी चोटें आई थीं.

"मार-पिटाई करने वालों का आरोप था कि इन औरतों ने उनके बच्चे पर जादू-टोना कर दिया है. हमने उन्हें समझाया और अंधविश्वास के लिए फटकार लगाई. फिर महिलाओं को अस्पताल ले जाया गया".

इलाक़े के पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार ने बीबीसी को बताया कि महिलाओं की शिकायत पर एक व्यक्ति को हिरासत में ले लिया गया है और उसके ख़िलाफ़ धारा 323, 504 और 506 के तहत मामला दर्ज किया गया है.

हालांकि पुलिस अधीक्षक का कहना है कि यह एक समान्य मामला है और आदिवासी बहुल इस इलाके में महिलाओं को डायन कहा जाना आम है.

आम है डायन कहा जाना

उन्होंने कहा, "ये गोंड आदिवासियों का इलाक़ा है. यहां प्रचलित सामाजिक कुरीतियों के तहत महिलाओं पर अक्सर इस तरह के आरोप लगाए जाते हैं".

"ये एक सामान्य मारपीट का मामला है. बाक़ी की कार्रवाई हम कोर्ट के आदेश से करेंगे."

ऐसे में इन महिलाओं की मदद को पहुंची शोभा देवी का कहना है कि पुलिस की गंभीरता इस बात से ही ज़ाहिर होती है कि इलाक़े के थाना इंजार्च ने घटनास्थल का मुआएना तक नहीं किया है और मौक़े पर पहुंचे दो सिपाहियों के हवाले से मामला दर्ज किया गया है.

उन्होंने बताया कि इस इलाक़े में पहले भी इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं और पुलिस को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए.

उन्होंने कहा, "पुलिस ने एफआईआर में सिर्फ मारपीट का मामला दर्ज किया है. ये महिलाएं तो खुद लिख नहीं सकतीं लेकिन उन्होने पुलिस को साफ़तौर पर बताया है कि उन्हें बुरी तरह पीटा गया है और उनके ज़ख्मों पर मिर्चें आदि लगाई गईं."

पुलिस अधीक्षक भले ही कार्रवाई का आश्वासन देते हों लेकिन ज़ख्मों से उबरती जासो देवी और पहवा देवी की सबसे बड़ी पीड़ा यही है कि उन्हें गांवभर के सामने डायन क़रार दे दिया गया है.

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