ज़िंदा रहेगी अरुणा शानबाग

अरुणा शानबाग

सुप्रीम कोर्ट ने बीमार नर्स अरुणा शानबाग मामले में यूथेनेसिया का इस्तेमाल कर मृत्यु की अपील को खारिज़ कर दिया है.

सुप्रीम कोर्ट में अरुणा शानबाग की तरफ से ये अपील लेखिका पिंकी विरानी ने की थी.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा कि पिंकी विरानी का इस मामले से कोई सरोकार नहीं बनता क्योंकि अरुणा की देख रेख का काम किंग एडवर्ड मेमोरियल अस्पताल कर रहा है.

कोर्ट ने अपने फ़ैसले में केईएम अस्पताल के नर्सों की तारीफ़ की है और कहा है कि अस्पताल के स्टाफ ने अरुणा की बेहतरीन देखभाल की है.

पिंकी विरानी की वकील शुभांगी तुली का कहना था कि कोर्ट ने सीधे सीधे यूथेनेसिया का इस्तेमाल कर मृत्यु को अनुमति नहीं दी है लेकिन अप्रत्यक्ष रुप से यूथेनेसिया के इस्तेमाल को अनुमति दी है और इस बारे में कुछ नियम बनाए हैं.

शुभांगी तुली का कहना था, ''फै़सला बहुत लंबा है. हम इसे पूरा नहीं पढ़ पाए हैं. सीधे यूथेनेसिया का मतलब है ज़हरीला इंजेक्शन देना लेकिन अप्रत्यक्ष यूथेनेसिया का मतलब है कि परिस्थितियों को देखकर जीवन को बढ़ाने वाली चीज़ें कम कर दी जाएं ताकि मरीज को धीरे धीरे कष्ट से मुक्ति मिले. ये कौन सी परिस्थितियां होंगी ये डॉक्टर तय करेंगे.''

अरुणा शानबाग का मामला बहुत पुराना है. केईएम अस्पताल में नर्स रही अरुणा पर अस्पताल के ही एक वार्ड ब्वॉय ने हमला किया था और जंजीरों में जकड़ कर उनका बलात्कार किया था.

अरुणा 23 नवंबर 1973 से ही केईएम में भर्ती हैं और मानसिक रुप से अशक्त भी भी हैं. 60 वर्ष से ऊपर की अरुणा हमले के बाद से ही अपाहिज हो गई और वो अब बोल भी नहीं पाती हैं.

पिंकी विरानी ने अरुणा की जीवनी भी लिखी है और उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी कि अरुणा की स्थिति को देखते हुए उन्हें मरने की अनुमति दी जानी चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने पिंकी विरानी की इस अपील को ख़ारिज कर दिया है.

केईएम अस्पताल के स्टाफ ने कोर्ट के इस फ़ैसले का स्वागत किया है और कहा है कि वो काफी राहत महसूस कर रहे हैं. असल में अरुणा के परिवार वालों ने भी अरुणा को छोड़ दिया है लेकिन केईएम अस्पताल का स्टाफ लगातार अरुणा की देखभाल करता रहा है.

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