क्रॉस वोटिंग के बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी जीते

जगन रेड्डी

आंध्र प्रदेश में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी गुरुवार को एक बड़ी परेशानी से बच गई जब विधान परिषद् चुनाव में बाग़ी नेता वाईएस जगनमोहन रेड्डी के समर्थक विधायकों की क्रॉस वोटिंग के बावजूद पार्टी के तमाम प्रत्याशी विजयी रहे.

विधान परिषद् की दस सीटों के लिए गुरुवार को मत दान हुआ था जिसमें जगन के समर्थक नौ विधायकों ने किसी दूसरे प्रत्याशी को वोट दिया.

इन विधायकों से कांग्रेस के उमीदवार और वरिष्ठ नेता मोहम्मद जानी को वोट देने के लिए कहा गया था.

इसके कारण मोहम्मद जानी को केवल १७ पहले प्राथमिक वोट ही मिल सके जबकि उन्हें जीतने के लिए २७ वोटों की ज़रूरत थी.

इससे ऐसा लगा कि शायद मोहम्मद जानी यह चुनाव हार जाएँगे. लेकिन बाद में दूसरे और तीसरे दौर की गिनती के बाद मोहम्मद जानी ने चुनाव जीत लिया. इसे उल्टा जगन ग्रुप के लिए पराजय के रूप में देखा जा रहा है.

विश्लेषण से लगता है कि जगन के समर्थक नौ विधायकों ने मोहम्मद जानी की जगह मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रत्याशी अल्ताफ़ रिज़वी को वोट दिया.

नहीं दिया वोट

रिज़वी को ३६ वोट मिले और वो सबसे पहले विजयी घोषित कर दिए गए.

जगन के समर्थकों की मंशा यही थी कि कांग्रेस के प्रत्याशी को हराकर मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी को असफल सिद्ध किया जाए और पार्टी को चोट पहुँचाई जाए लेकिन वो इसमें सफल नहीं हो सके.

विधान परिषद् की दस सीटों में से पाँच पर कांग्रेस का और दो पर उसकी मित्र मजलिस और प्रजा राज्यम का कब्ज़ा हो गया है.

दूसरे विपक्षी दल तेलुगु देसम ने दो सीटें जीतीं और तीसरी पर उसके मित्र दल कम्युनिस्ट पार्टी को जीत मिली.

जो दो प्रत्याशी चुनाव हार गए उनमें तेलंगाना राष्ट्र समिति के महमूद अली और तेलुगु देसम की प्रतिभा भारती शामिल हैं.

इन चुनाव को इसी लिए महत्त्व दिया जा रहा था कि इस में जगनमोहन रेड्डी के समर्थकों की भूमिका क्या रहेगी.

कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने नतीजों पर राहत की सांस ली है और कहा है कि इससे यह बात सिद्ध होती है कि कांग्रेस में जगन का कोई प्रभाव नहीं है और दस से भी कम विधायक उनके साथ हैं. ऐसे संकेत हैं कि अब कांग्रेस पार्टी इन विधायकों के विरुद्ध कार्रवाई कर सकती है.

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