अदालत का रेल जाम हटाने का आदेश

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Image caption मुरादाबाद दिल्ली रेल मार्ग पर यातायात दो हफ़्तों से ठप्प है

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक असाधारण कदम उठाते हुए मायावती सरकार से कहा है कि वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुरादाबाद के पास रेल लाइन को जाट आंदोलनकारियों से फ़ौरन खाली कराए.

आंदोलन के कारण मुरादाबाद दिल्ली रेल लाइन दो हफ़्ते से बंद है. दर्जनों रेलगाड़ियाँ बंद होने से लाखों यात्री होली के मौक़े पर परेशान हो रहे हैं.

जाट समुदाय केंद्र सरकार में पिछड़े वर्गों के तहत आरक्षण चाहता है और उनके आंदोलन को मुख्यमंत्री मायावती ने समर्थन दिया है.

असाधारण बात यह है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में मुख्य न्यायाधीश एफ़ आई रिबेलो ने स्वयं इस मामले का संज्ञान लेकर जस्टिस उमानाथ सिंह और जस्टिस वी के दीक्षित की पीठ गठित की.

खंडपीठ ने आला अधिकारियों को तलब किया और एक घंटे तक सुनवाई की. राज्य सरकार के अधिकारी इस मामले में टालमटोल करते रहे.

केंद्र सरकार के वकील ने अदालत में कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार राजनीतिक दलों के आंदोलन में तो पुलिस का इस्तेमाल करती है लेकिन इस मामले में वह हाथ पर हाथ धरे बैठी है.

बाद में उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट सचिव शशांक शेखर सिंह के कहा कि मुख्यमंत्री ने इस मामले पर बैठक की है लेकिन जाट आरक्षण पर कार्रवाई केंद्र सरकार को करनी है.

ग़ैर क़ानूनी जाम

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Image caption होली के समय गाड़ियों के ना चलने से बड़ी संख्या में यात्री परेशान हैं

उधर इलाहाबाद से स्थानीय पत्रकार ऋषि मालवीय ने बताया है कि हाईकोर्ट ने जाटों के रेल रोको आंदोलन को पूरी तरह ग़ैरक़ानूनी क़रार दिया है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरक्षण की माँग को लेकर 13 दिन से दिल्ली लखनऊ रेल लाइन पर जुटे आंदोलनकारियों पर कड़ा रुख़ अख्तियार करते हुए कहा है कि अपनी माँग को लेकर रेल लाइन जाम करना पूरी तरह से ग़ैर क़ानूनी है.

अदालत ने कहा कि उन्होंने 29 तारीख़ को प्रदेश के डीजीपी को कहा है कि वो इस मामले में कोर्ट में पेश होकर ये बताएँ कि उन्होंने इस मामले में क्या क़दम उठाए हैं.

अदालत ने ये भी कहा की रेल यातायात जाम करना पूरी तरह से ग़ैरक़ानूनी है और इसके कारण रोज़ 60 से ज़्यादा ट्रेनें रद्द करनी पड़ रही हैं और दर्जनों गाड़ियों के रूट बदले जा रहे हैं जिससे रोज़ लाखों लोगों को परेशानियाँ झेलनी पड़ रही हैं.

कोर्ट ने साथ ही स्पष्ट किया कि उनका जाट आंदोलन से ज़्यादा लेना-देना नहीं है और उनका मतलब सिर्फ़ इस बात से है कि आंदोलन के लिए रेल लाइन जाम करना पूरी तरह से अवैध है.

अदालत ने ये भी कहा कि आरक्षण की उनकी ये मांग जायज़ है या नाजायज़, इस बात को भारत सरकार को तय करना है.

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