स्वास्थ्य सेवाओं पर नहीं लगेगा सेवा कर

Image caption बजट में स्वास्थ्य सेवाओं पर पाँच प्रतिशत सेवा कर लगाने का प्रस्ताव था.

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने स्वास्थ्य सेवाओं पर इस वर्ष के बजट लगाए गए 'सर्विस टैक्स' को वापस ले लिया है.

वित्त मंत्री ने 2011 के बजट में स्वास्थ्य सेवाओं पर पाँच प्रतिशत सेवा कर लगाने का प्रस्ताव रखा था.

मंगलवार को वित्त बिल पर लोकसभा में चर्चा के दौरान वित्त मंत्री ने इसकी घोषणा की है.

लोकसभा में प्रणब मुखर्जी ने कहा, “सदन में और सदन के बाहर लोगों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए इस बजट में प्रस्तावित स्वास्थ्य सेवाओं पर लगाए गए पाँच प्रतिशत सेवा कर को मैं वापस लेता हूँ.”

प्रणव मुखर्जी ने स्पष्ट किया कि ये कर धन जुटाने के मकसद से नहीं लगाया गया था बल्कि वह चाहते थे कि स्वास्थ्य सेवाओं को आगे आने वाले गुड्स और सर्विसेज़ कर के अनुरुप तैयार किया जा सके.

गौरतलब है कि स्वास्थ्य सेवाओं पर लगाए गए सेवा कर की इस क्षेत्र से जुड़े लोगों ने कड़ी आलोचना की थी. इस कर का विरोध करने वालों ने इसे विपदा कर करार दिया था.

विरोध

बजट में स्वास्थ्य सेवाओं पर पांच प्रतिशत सर्विस टैक्स के प्रस्ताव के विरोध में एक अभियान शुरू किया था. बंगलौर के नारायण हृदयालय के चेयरमैन डॉक्टर देवी प्रसाद शेट्टी ने कुछ समाचार पत्रों में 'आम आदमी के नाम एक पत्र' शीर्षक से एक विज्ञापन जारी किया था.

इस पत्र में सर्विस टैक्स से स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ने वाले प्रभाव का ज़िक्र किया गया था. पत्र में अस्पतालों पर लगाए जाने वाले इस टैक्स को 'विपदा टैक्स' (मिज़री टैक्स) कारार दिया था.

डॉक्टर देवी शेट्टी ने इस टैक्स का विरोध करने के लिए आम आदमी से 12 मार्च को विपदा दिवस (मिज़री डे) मनाने का आग्रह किया था.

इससे पहले भारत में कुछ बड़े अस्पताल समूहों को चलाने वाले उद्योगपति भी इस सर्विस टैक्स का विरोध कर चुके हैं.

बजट वाले दिन यानि 28 फ़रबरी को फ़ोर्टिस के एमडी शिविंदर सिंह, अपोलो की कार्यकारी निदेशक संगीता रेड्डी और वॉकहार्ट्ड के चेयरमैन डॉक्टर हाबिल खोराकीवाला भी इस टैक्स का विरोध कर चुके हैं.

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