कभी किसी सांसद को रिश्वत नहीं दी: मनमोहन

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Image caption मनमोहन सिंह के पक्ष में राज्यसभा में पी चिदंबरम उतरे

प्रधानमत्री मनमोहन सिंह ने संसद में वर्ष 2008 के विश्वास मत के दौरान पैसे के लेन-देन के आरोपों और फिर विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव पर सरकार का डट कर बचाव किया है. उन्होंने दोहराया कि सरकार ने कभी किसी सांसद को रिश्वत नहीं दी और इस मामले में जाँच चल रही है.

इससे पहले इस मामले पर लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने प्रधानमंत्री पर सीधे निशाना साधा जिसके जवाब में प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार बिल्कुल निर्दोष है.

जनादेश नहीं हो सकता बचाव की दलीली: सुषमा

उधर राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने सरकार और विशेष तौर पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर निशाना साधा. उनका कहना था कि कैमरा झूठ नहीं बोलता और सरकार को ये पता करना चाहिए कि पैसा कौन लेकर आया था.

अरुण जेटली का कहना था, "प्रधानमंत्री के बयान से सार्वजनिक जीवन में नैतिकता का सवाल खड़ा हो जाता है. क्या चुनाव जीतने से अपराध माफ़ हो जाता है...यदि बोफ़ोर्स मामले में कांग्रेस पार्टी हार गई तो क्या जो-जो लोग हारे वो दोषी हैं? इस तरह से हर माफ़िया कहेगा कि मुझे तो लोगों ने चुन लिया है तो मेरा हर गुनाह माफ़ हो गया है."

राज्य सभा में विपक्ष के नेता का कहना था कि जो 2008 में हुआ था वह भारतीय लोकतंत्र पर की गई धोखाधड़ी थी और हर बार जब ये मामला उठता है तो वह हमें याद दिलाता है कि देश राजनीतिक नेताओं से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद करता है.

इसके जवाब में गृह मंत्री पी चिदंबरम ने राज्यसभा में सरकार और प्रधानमंत्री का बचाव किया और कहा कि रिपोर्ट के पढ़ने का नज़रिया भी अलग हो सकता है और इससे निष्कर्ष भी अलग-अलग निकाले जा सकते हैं लेकिन मनमोहन सिंह के बयान का संदर्भ देखना चाहिए.

सरकार ने किसी सांसद को रिश्वत नहीं दी: मनमोहन

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने लोकसभा में अपने जवाब में दोहराया कि उनकी सरकार ने कभी किसी सांसद को रिश्वत नहीं दी है और इस मामले की जांच चल रही है.

उन्होंने विपक्षी भाजपा के नेता लालकृष्ण आडवाणी पर टिप्पणी करते हुए कहा, "आडवाणी जी मानते थे कि प्रधानमंत्री बनना उनका जन्मसिद्ध अधिकार है इसलिए उन्होंने मुझे कभी माफ़ नहीं किया. लेकिन आडवाणी जी लोगों ने हमें मताधिकार दिया. आप साढ़े तीन साल इंतज़ार करें."

वर्ष 2008 के विश्वास मत से जुड़े आरोपों के मामले में मनमोहन सिंह ने कहा, "हमारी सरकार ने कभी किसी सांसद को रिश्वत नहीं दी. इस मामले की जांच के लिए समिति गठित हुई थी. इस मामले की आगे भी जांच जारी है.''

सुषमा स्वराज के तीखे प्रहारों के जवाब में प्रधानमंत्री ने एक शेर भी पढ़ा. उनका कहना था, '' मैं सुषमा जी की तरह बोल तो नहीं सकता लेकिन उन्होंने एक शेर पढ़ा तो मैं भी एक शेर सुनाता हूँ."

प्रधानमंत्री का शेर कुछ इस प्रकार था - "माना कि तेरी दीद के काबिल नहीं हूं मैं, तू मेरा शौक तो देख मेरा इंतज़ार तो कर."

प्रधानमंत्री ने अपने पूरे भाषण में सरकार का बचाव किया और सरकार को क्लीन चिट दी.

उनका कहना था, ''मैंने पहले भी कहा है और अब भी कह रहा हूं कि अमरीकी दूतावास और कूटनीतिज्ञों के बीच जो केबल भेजे गए हैं उसकी हम पुष्टि नहीं कर सकते हैं. ये उनका मामला है.''

प्रधानमंत्री का कहना था, ''मैंने न तो कभी किसी को अधिकृत किया कि वो रिश्वत देने की कोशिश करे या रिश्वत देने का काम करे. इस मामले में समिति ने जो बात कही है उसे मैं मानता हूं. उसमें हम पर कोई आरोप नहीं लगाए गए.''

प्रधानमंत्री के बयान का संदर्भ देंखें: चिदंबरम

राज्यसभा में बोलते हुए गृह मंत्री पी चिदंबरम ने प्रधानमंत्री का बचाव किया. उनका कहना था, "प्रधानमत्री ने क्या कहा था? यही न कि सदन में एक खुले मतदान में सरकार की जीत हुई. रिश्वत के आरोप थे और इनकी एक संसदीय समिति ने जाँच की थी लेकिन अपर्याप्त सबूत मिले थे."

गृह मंत्री का कहना था,"आप इस निष्कर्ष से असहमत हो सकते हैं. लेकिन विपक्ष के नेता (अरुण जेटली) ने यहाँ नहीं कहा लेकिन बाहर कहीं कहा कि प्रधानमंत्री ने सच्चाई के साथ समझौता किया. मैं तब तक बहस कर सकता हूँ जब तक मेरे सारी साथी तालियाँ बजाते रहें और आप अपना भाषण दे सकते हैं जब तक आपके सहयोगी तालियाँ बजाते रहते हैं. हमारे मत फिर भी अलग-अलग हो सकते हैं."

चिदंबरम के बयान के दौरान विपक्षी सांसदों का हंगामा भी हुआ लेकिन चिदंबरम ने अपना बयान जारी रखा.

उनका कहना था, "दिल्ली पुलिस के पास एफआईआर दर्ज हो चुकी है. जाँच चल रही है और मुझे बताया गया है कि जल्द ही ये पूरी हो जाएगी. ये कहना ग़लत होगा कि जाँच नहीं हो रही है."

चिदंबरम का कहना था, "चुनावी नतीजे से अपराध ख़त्म हो जाता है, सवाल ये है ही नहीं. सवाल ये है कि क्या लोकसभा को सरकार में विश्वास था या नहीं. प्रधानमंत्री ने नहीं कहा कि अपराध धुल गया. इसका संदर्भ देखिए आपने लोकसभा में आरोप लगाए हमनें वहाँ सांसदों का विश्वास जीता और फिर आपने जनता के बीच आरोप लगाया और वहाँ भी हमने लोगों का विश्वास जीता."

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