जाट प्रदर्शनकारी तत्काल रेलमार्गों से हटें: हाई कोर्ट

Image caption जाट समुदाय सरकारी नौकरियों में आरक्षण की मांग पर आंदोलन कर रहा है

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने सरकारी नौकरियों में आरक्षण की मांग कर रहे जाट समुदाय के सदस्यों को आदेश दिया है कि वे तत्काल रेलमार्गों को खोलें और इन्हें अपने विरोध कार्यक्रम से अलग रखें.

गुरुवार को अपने आदेश में हाई कोर्ट ने कहा कि जाट प्रदर्शनकारियों को विरोध करने का हक है लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि उन्हे रास्ते रोकने की इजाज़त है.

अदालत का ये आदेश काफ़ी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले 15 दिनों से जाट समुदाय के सदस्य सरकारी नौकरियों में आरक्षण की माँग करते हुए कई रेलमार्गों को रोक कर बैठे हुए हैं.

'विरोध शांतिपूर्ण ओर क़ानून के दायर में हो'

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश राजन गोगोई और न्यायधीश केएस आहलूवालिया की पीठ ने कहा, "हमारा नज़रिया है कि विभिन्न प्रदर्शनकारी संगठनों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए विरोध करने का अधिकार हो सकता है लेकिन उनका विरोध क़ानून के दायरे में होना चाहिए जिससे राष्ट्रीय हितों पर बुरा असर न हो."

अदालत ने कहा, "प्रदर्शनकारी अपना विरोध जारी रख सकते हैं, यदि उनका प्रदर्शन शांतिपूर्ण, क़ानूनी और ग़ैर-हिंसक हो."

इस आदेश को लागू करने के लिए अदालत ने ज़िला कलेक्टर और ज़िला मैजिस्ट्रेट को आदेश दिया है कि वे फ़ैसले की कॉपी प्रदर्शनकारियों को सौपें.

इस सुनवाई के दौरान हरियाणा पुलिस के महानिदेशक रणजीव दलाल, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक बीएस संधु और गृह सचिव समीर माधुर अदालत में मौजूद थे.

हरियाण पुलिस के महानिरीक्षक केके माथुर के हलफ़नामें के हवाले से अदालत ने कहा कि सरकार ने मौजूदा स्थिती से निपटने के लिए प्रयाप्त सुरक्षा बल एकत्र कर लिए हैं.

पीठ ने कहा कि बिना रोकटोक के रेलगाड़ियों का चलना देश हित में है और मौजूदा प्रदर्शनों से रेल आवागमन बड़े स्तर पर प्रभवित हुआ है जिसमें दिल्ली-चंडीगढ़ रेल सेवा शामिल है.

अदालत ने ये फ़ैसला चड़ीगढ़ के एक सामाजिक संगठन की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया.

संबंधित समाचार