पत्नी देगी गुज़ारा भत्ता:दिल्ली हाईकोर्ट

न्यायपालिका
Image caption अदालत का फ़ैसला पती के हक़ में

पत्नी के भरण पोषण की आमतौर पर ज़िम्मेदारी पति की होती है पर शायद हमेशा नहीं.

दिल्ली हाईकोर्ट ने निचली अदालत के एक फ़ैसले को बरक़रार रखते हुए कहा है कि अगर किसी पत्नी की आय पति से ज़्यादा है तो उसे अपने पति को गुज़ारा भत्ता देना होगा.

न्यायमूर्ति जी एस सिस्तानी ने आदेश दिया कि इस मामले में पत्नी अपने 55 साल के पति को हर महीने 20 हज़ार रुपए गुज़ारा भत्ता देगी. अदालत ने साथ ही पति के आने जाने की सुविधा के लिए पत्नी को उसे एक ज़ेन कार देने को भी कहा है.

भत्ता न देने की गुहार

इस महिला ने निचली अदालत के फ़ैसले के ख़िलाफ़ हाईकोर्ट में अपील की थी. इसे अदालत ने ख़ारिज कर दिया है. अदालत का तर्क था कि महिला की आय लाखों में है जबकि पति के पास कमाई का कोई ज़रिया नहीं है. ऐसे में पति के भरणपोषण की ज़िम्मेदारी पत्नी की है.

दरअसल ये व्यक्ति एक ऑटो चलाता है. इसकी शादी 1982 में हुई थी. उसकी 26 साल की बेटी और 24 साल का बेटा है. इस दंपत्ति का जीवन ठीक ठाक चल रहा था.

पर अपने पिता की मृत्यु के बाद उसने ग्रेटर नोएडा में एक लाख रुपए में पत्नी के नाम पेइंग गेस्ट रखने का एक व्यवसाय शुरु किया था जो बहुत सफल रहा और इससे लाखों की आय होने लगी.

क्या है मामला

आरोप है कि उसकी पत्नी ने उसे घर से बाहर निकाल दिया और अख़बार में विज्ञापन दे दिया कि उसका उससे कोई संबंध नहीं है.

इसके बाद इसने अपनी पत्नी से पहले तलाक़ की अर्ज़ी दी और फिर 2008 में गुज़ारा भत्ता मांगते हुए निचली अदालत में याचिका दायर की.

पत्नी ने कहा था कि उसको अपनी बीमारी पर बहुत ख़र्च करना पड़ता है, उसके बच्चें बड़े हो रहे हैं और बेटी की शादी करनी है इसलिए वो ये गुज़ारा भत्ता नहीं दे सकती.

पर ऊपरी अदालत ने निचली अदालत के फ़ैसले को बरक़रार रखा है. तीन महीने के अंदर उसे निचली अदालत के फ़ैसले का पालन करना पड़ेगा.

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